अमृतसर में लंगूर मेले की रौनक, 79 वर्षीय लाली बजरंगी बने श्रद्धा का केंद्र

अमृतसर में लंगूर मेले की रौनक, 79 वर्षीय लाली बजरंगी बने श्रद्धा का केंद्र

अमृतसर के लाली बजरंगी 55 वर्षों से हनुमान बन रहे है। - Dainik Bhaskar
अमृतसर | 28 सितंबर 2025

शरद नवरात्रों के पावन अवसर पर 22 सितंबर से आरंभ हुआ अमृतसर का प्रसिद्ध लंगूर मेला श्रद्धा, भक्ति और परंपरा की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। शहर की गलियां भक्तों की भीड़ और भजन-कीर्तन से गूंज रही हैं। देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालु अपने बच्चों को लंगूर बनाकर बड़े श्री हनुमान मंदिर और दुर्गियाना मंदिर में माथा टेक रहे हैं।

इसी मेले की भीड़ में एक चेहरा ऐसा भी है, जो बीते 55 वर्षों से लगातार श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। लोहरी गेट निवासी सतपाल श्रीवास्तव उर्फ लाली बजरंगी, आज 79 वर्ष की उम्र में भी हर साल की तरह हनुमान जी का रूप धारण कर श्रद्धा और समर्पण की मिसाल बने हुए हैं।

55 वर्षों से निभा रहे हनुमान का किरदार

यह सिलसिला शुरू हुआ था सालों पहले, जब लाली बजरंगी मात्र 24 वर्ष के थे। उस समय लोहरी गेट पर आयोजित रामलीला में हनुमान जी का किरदार निभाने वाला कलाकार अचानक अनुपस्थित हो गया। आयोजन संकट में पड़ गया। तब उनके दोस्तों ने लाली की ओर देखा और कहा, “लाली, तुम क्यों नहीं करते?” बिना झिझक उन्होंने हामी भर दी।

फिर क्या था—उसी रात लाली ने घर नहीं जाने का फैसला किया और पास के भद्रकाली मंदिर ग्राउंड में अपने दोस्तों के साथ पूरी रात अभ्यास करते रहे। वहीं से शुरू हुई यह आस्था की यात्रा आज भी बदस्तूर जारी है।

उम्र महज एक संख्या

जहां एक ओर उम्र के इस पड़ाव पर लोग आराम पसंद करते हैं, वहीं लाली बजरंगी आज भी उसी जोश और ऊर्जा से हनुमान जी का वेश धारण करते हैं। लाली कहते हैं, “मुझे जो आत्मिक शांति इस सेवा से मिलती है, वह शब्दों में नहीं बताई जा सकती। जब भक्त मेरे चरण स्पर्श करते हैं, तो ऐसा लगता है मानो साक्षात प्रभु ने मुझे यह सौभाग्य दिया हो।”

मेले में बना आकर्षण का केंद्र

हर साल की तरह इस बार भी लाली बजरंगी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बच्चे, बूढ़े और युवा—हर कोई उनके साथ फोटो खिंचवाने और उनका आशीर्वाद लेने को आतुर दिखाई देता है। मंदिरों के प्रांगण में बज रहे भजन, ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्तों की जयकारों के बीच लाली बजरंगी की मौजूदगी श्रद्धा के रंगों को और भी गहरा कर देती है।


लंगूर मेले के इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भक्ति, समर्पण और परंपरा की डोर जितनी मजबूत होती है, उतनी ही लंबी और प्रेरणादायक भी होती है। लाली बजरंगी जैसे लोग समाज को यह संदेश देते हैं कि सच्ची श्रद्धा के लिए न उम्र मायने रखती है, न हालात—बस चाहिए तो एक निष्ठा भरा मन।

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