पटना. वैसे मरीज जिनकी आंत खराब हो चुकी है और इस कारण वह मल-मूत्र त्यागने में असमर्थ हैं, उनके लिए राहत भरी खबर है. ऐसे मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बिहार और झारखंड में पहली बार राजधानी पटना के आईजीआईएमएस के सामान्य सर्जरी विभाग में स्टोमा क्लीनिक की शुरुआत हो गई है. यहां सस्ते दर पर ऐसे मरीजों का इलाज किया जाएगा.
आईजीआईएमएस के उपनिदेशक और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि यह स्टोमा क्लीनिक भविष्य में इस प्रदेश के मरीजों के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध होगा. यहां स्टोमा के अलावा मरीज को मानसिक व सामाजिक परेशानियों को भी दूर करने का तरीका बताया जाएगा. यहां स्टोमा वाले मरीजों को पूरी देखभाल की जा सकेगी.
क्या है स्टोमा
कई बार आंत में चोट लगने, कैंसर या किसी अन्य वजह से हुई रुकावट या खराब होने के कारण मल-मूत्र बाहर नहीं निकाल पाता है. ऐसे में मरीज के पेट में सर्जरी से एक छेद बनाया जाता है. इसकी मदद से शरीर से मल या मूत्र को बाहर निकालने के लिए एक बायपास व्यवस्था की जाती है. सर्जरी के बाद मल-मूत्र को इक्कठा करने के लिए एक बैग रखा जाता है.सर्जरी की इस पूरी प्रक्रिया को ऑस्टॉमी या स्टोमा कहा जाता है. यह दो तरह का होता है. आंत में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर यह सर्जरी कुछ हफ्तों के लिए की जाती है. वहीं जब आंत में कैंसर हो गया है तो बैग को पूरी जिंदगी लगाना पड़ता है.
बिहार-झारखंड का पहला क्लिनिक
डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि आईजीआईएमएस में खुला यह स्टोमा क्लिनिक बिहार-झारखंड का पहला क्लिनिक है. इन दोनों राज्यों में स्टोमा के लगभग 50 हजार मरीज हैं. स्टोमा मरीजों को निजी अस्पतालों में काफी पैसा खर्च करना पड़ता था. दूसरी ओर, पेट में सटे स्टोमा थैलियों के लीक होने पर दुर्गंध और बदबू से लोग मरीजों को अपने पास नहीं आने देते थे. वहीं मरीज इस तकलीफ और दुर्व्यवहार से परेशान और शर्मिंदा रहते थे. इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए एक छत के नीचे मरीजों को सारी सुविधा कम खर्च में उपलब्ध कराने के लिए इस क्लिनिक की शुरुआत की गई है.
कितना आएगा खर्च
डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि इस सर्जरी में बैग का सबसे अहम रोल होता है. हर मरीज के लिए अलग-अलग बैग का इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए चार्ज भी अलग-अलग होता है. यहां के इस क्लिनिक में मात्र 50 रुपए में रजिस्ट्रेशन होगा. बैग भी सीधे कंपनी के रेट पर यहीं पर उपलब्ध करवाया जाएगा. बैग लेने के लिए किसी को भी बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. डॉ. मनीष ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि यह आम बीमारी है. इसको लेकर परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है. आईजीआईएमएस के जीएस -1 वॉर्ड में जाएं और सिस्टर टेबल के सामने अपना इलाज करवाएं.
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FIRST PUBLISHED : May 4, 2024, 23:32 IST










