चंडीगढ़: सेक्टर-56 बल्क मार्केट प्रोजेक्ट में देरी, पर्यावरण मंजूरी की आवश्यकता
चंडीगढ़ | 22 अप्रैल 2025 चंडीगढ़ के सेक्टर-56 में प्रस्तावित बल्क मार्केट प्रोजेक्ट को लेकर एक और विलंब की संभावना सामने आ रही है। प्रशासन को इस परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) प्राप्त करनी होगी, जो केंद्र सरकार की स्वीकृति के बिना संभव नहीं है। इससे फर्नीचर और मार्बल मार्केट को सेक्टर-56 में शिफ्ट करने की प्रक्रिया में और देरी हो सकती है।
पर्यावरण मंजूरी जरूरी
डिप्टी कमिशनर और एस्टेट अफसर, निशांत कुमार यादव ने जानकारी दी कि इस प्रोजेक्ट का कुल निर्मित क्षेत्र (Built-up Area) 20,000 वर्ग मीटर से अधिक है, इसलिए इस परियोजना के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) के तहत स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक सुनवाई (Public Hearing) भी आयोजित की जाएगी, जिससे पहले इस मंजूरी को प्राप्त करना जरूरी है। एस्टेट ऑफिस ने इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए यूटी पर्यावरण विभाग को पत्र भेजा है।
पर्यावरण मंत्रालय के दिशा-निर्देश
अधिकारियों के अनुसार, पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, जिन प्रोजेक्ट्स में निर्मित क्षेत्र 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक हो, वहां निर्माण कार्य शुरू करने से पहले पर्यावरण मंजूरी प्राप्त करना अनिवार्य है। जब तक इस स्वीकृति की प्राप्ति नहीं होती, तब तक कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता।
बल्क मार्केट में पुनर्वास योजना
इस बल्क मार्केट प्रोजेक्ट में धनास मार्बल मार्केट और फर्नीचर मार्केट के कारोबारियों को पुनर्वासित करने की योजना है। एस्टेट ऑफिस मार्केट में बनाए गए बूथों और प्लॉट्स की नीलामी की योजना बना रहा है। इसमें 200 एक कनाल के प्लॉट और 55 बूथ प्रस्तावित हैं। यह प्रोजेक्ट पहले ही कई वर्षों से अटका हुआ है।
प्रशासन की योजना
पिछले साल, प्रशासन ने सेक्टर-56 में बल्क मार्केट विकसित करने की योजना को अंतिम रूप दिया था। इस योजना के तहत, मार्बल और फर्नीचर कारोबारियों को वैध तरीके से प्लॉट या बूथ खरीदने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद प्रशासन की योजना थी कि मौजूदा मार्बल और फर्नीचर मार्केट को ध्वस्त कर दिया जाएगा, ताकि नए बल्क मार्केट का निर्माण किया जा सके।
भविष्य की दिशा
इस प्रोजेक्ट को लेकर स्थिति अब पर्यावरण मंजूरी पर निर्भर हो गई है, और यह देखना होगा कि इस मंजूरी के बाद निर्माण कार्य कब शुरू होता है। फिलहाल, कारोबारियों के लिए यह मामला काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनका भविष्य इस प्रोजेक्ट की स्वीकृति पर टिका हुआ है।