हजारीबाग. शादी का सीजन चल रहा है. ऐसे में कई प्रकार की मिठाइयों की धूम मची है. लेकिन, बिहार-झारखंड में शादी के दौरान एक ऐसी मिठाई का प्रचलन का है, जिसके बिना कई रस्में अधूरी रह जाती हैं. इस खास मिठाई का नाम खाजा है. शादी के दौरान खाजा मिठाई का लेन-देन करने के लिए इस्तेमाल करते हैं.
वैसे तो यह मिठाई का नाम सुनते ही लोग बिहार के सिलाव को याद करते हैं. सिलाव का खाजा पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. माना जाता है कि खाजा मिठाई की शुरुआत भी सिलाव से हुई थी, लेकिन हजारीबाग में भी एक खाजा गली है. जहां 6 से अधिक दुकानों में खाजा बनाया जाता है. शादी के सीजन में यहां खरीदारों की भीड़ जुटी रहती है.
एक परिवार की सभी दुकानें
खाजा स्टोर के संचालक विकास कुमार बताते हैं कि ये सभी दुकानों का संचालन करने वाला लोग एक ही परिवार है. खाजा गली में सबसे पुरानी दुकान 1972 में स्थापित की गई थी. तभी से धीरे-धीरे परिवार के अन्य लोगों द्वारा यहां और दुकानें खोली गई हैं. यहां पर 1972 से ही खाजा बनाने के काम चल रहा है. खाजा के अलावा यहां गुजिया, अनरसा और तिलकुट भी बनाया जाता है. अभी खाजा 160 और 200 रुपये किलो है. 160 वाला खाजा नॉर्मल और खड़ी डिजाइन में होता है, वहीं ₹200 किलो वाला खाजा गोल होता है.
बिहार से आए कारीगर
विकास कुमार आगे बताते हैं कि शादी के सीजन को देखते हुए रोजाना लगभग 70 किलो खाजा बनाया जा रहा है. जो हजारीबाग, कोडरमा, रामगढ़, चतरा आदि जिलों में जाता है. शादी के समय में गया से और कारीगरों को यहां खाजा बनाने के लिए बुलाया गया है, जो सुबह से शाम तक खाजा बना रहे हैं.
ऐसे होता है तैयार
खाजा बनाने वाले कारीगर संतोष कुमार बताते हैं कि खाजा कई परत की मिठाई है. एक खाजा में 52 परत होती है. इस मिठाई को बनाने के लिए सबसे पहले गेहूं का आटा और मैदा में मावा व डालडा मिक्स किया जाता है. इसके बाद लोई बनाकर इसे बेल कर लंबा किया जाता है. फिर उसे कई तह में मोड़ा जाता है. फिर इसे बेलकर खाजा का आकार दिया जाता है. इसके बाद गरमा गरम तेल में छानकर चीनी की पतली चाशनी में डाला जाता है. चाशनी से निकालकर कुछ देर हवा लगाया जाता है. इस प्रकार यह मिठाई तैयार हो जाती है.
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FIRST PUBLISHED : May 1, 2024, 15:56 IST










