पंजाब की पंथक राजनीति में बड़ा बदलाव: नई अकाली पार्टी के गठन की घोषणा आज, ज्ञानी हरप्रीत सिंह बन सकते हैं प्रधान

पंजाब की पंथक राजनीति में बड़ा बदलाव: नई अकाली पार्टी के गठन की घोषणा आज, ज्ञानी हरप्रीत सिंह बन सकते हैं प्रधान

अमृतसर, 11 अगस्त – पंजाब की सियासत और सिख पंथक राजनीति में आज एक ऐतिहासिक मोड़ आने वाला है। श्री अकाल तख्त द्वारा गठित शिरोमणि अकाली दल की भर्ती कमेटी आज एक नई पंथक पार्टी के गठन का ऐलान करने जा रही है। यह नई पार्टी शिरोमणि अकाली दल (बादल) से अलग बागी गुटों के साथ मिलकर “बुर्ज अकाली बाबा फूला सिंह” पर पंथक इकट्ठ के दौरान अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएगी।

ज्ञानी हरप्रीत सिंह संभाल सकते हैं नेतृत्व

सूत्रों के मुताबिक, नई पार्टी की कमान श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को सौंपी जा सकती है। हालांकि उन्होंने पहले इस पद को स्वीकार करने से इनकार किया था, लेकिन वरिष्ठ पंथक नेताओं के साथ लंबी चर्चा के बाद उन्होंने सहमति जता दी है। आज की प्रतिनिधि बैठक में उनके नाम की औपचारिक घोषणा होने की प्रबल संभावना है।

शिरोमणि अकाली दल (बादल) को सीधी चुनौती

नई पार्टी, शिरोमणि अकाली दल के मौलिक संविधान को अपनाकर, खुद को “असली अकाली दल” के रूप में चुनाव आयोग के सामने पेश करने की तैयारी में है। इससे सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाली पार्टी की चुनौतियाँ काफी बढ़ सकती हैं।
हालांकि, अकाली दल (बादल) का कहना है कि धर्म को राजनीति से जोड़ना संविधान विरोधी है और इससे उनकी पार्टी की मान्यता पर खतरा पैदा हो सकता है।

15 लाख सदस्य बना चुकी है भर्ती कमेटी

श्री अकाल तख्त द्वारा 2 दिसंबर 2024 को गठित 7 सदस्यीय भर्ती कमेटी को शिअद के पुनर्गठन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि बाद में कुछ सदस्यों के इस्तीफे के बाद यह टीम 5 सदस्योंमनप्रीत सिंह अयाली, गुरप्रताप सिंह वडाला, संता सिंह उमैदपुर, इकबाल सिंह झूंडा और बीबी सतवंत कौर – तक सिमट गई।

इस कमेटी ने बीते 6 महीनों में 15 लाख सदस्य बनाए हैं और आज होने वाली ऐतिहासिक प्रतिनिधि बैठक में नए पार्टी प्रधान का नाम घोषित किया जाएगा।


क्या बदल सकता है?

  • सुखबीर बादल के नेतृत्व वाली अकाली दल को गंभीर राजनीतिक झटका लग सकता है।

  • पंथक राजनीति का ध्रुवीकरण तेज हो सकता है।

  • आगामी 2027 पंजाब विधानसभा चुनाव में सियासी समीकरण बदल सकते हैं।

  • एसजीपीसी और धार्मिक संस्थाओं पर नियंत्रण को लेकर टकराव की स्थिति बन सकती है।

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