पंजाब सरकार ने 1158 सहायक प्रोफेसरों की भर्ती रद्द होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की पुनर्विचार याचिका
चंडीगढ़/नई दिल्ली, 11 अगस्त 2025: पंजाब सरकार ने राज्य के सरकारी कॉलेजों में की गई 1158 सहायक प्रोफेसरों और पुस्तकालयाध्यक्षों की भर्ती रद्द होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार ने शीर्ष अदालत में पुनर्विचार याचिका दाखिल करते हुए 14 जुलाई 2025 के आदेश में संशोधन की मांग की है।
शिक्षा मंत्री हर जोत सिंह बैंस ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि जब तक नई भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक इन शिक्षकों को अस्थायी रूप से कार्य पर बने रहने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों के हित और उच्च शिक्षा व्यवस्था की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
गौरतलब है कि अगस्त 2022 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 1158 सहायक प्रोफेसरों की भर्ती को रद्द कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियमों का पालन नहीं किया गया। इस भर्ती को कुछ आवेदकों द्वारा अदालत में चुनौती दी गई थी।
इस प्रक्रिया के तहत चयनित 484 उम्मीदवारों ने पहले ही नियुक्ति पत्र प्राप्त कर लिए थे, लेकिन उनकी पोस्टिंग नहीं हो पाई थी और उन्हें वेतन भी नहीं मिल रहा था। सरकार ने हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ डबल बेंच में अपील की थी, जिसमें सरकार को राहत मिली थी। हालांकि, इसके बाद एक पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में इस निर्णय को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को सरकार के खिलाफ फैसला सुनाया।
पंजाब सरकार अब इस मामले में सभी संभावित कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है और सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले में संशोधन की गुहार लगा रही है, जिससे कि इन सहायक प्रोफेसरों की सेवाएं फिलहाल जारी रह सकें और कॉलेजों में शिक्षा व्यवस्था बाधित न हो।