पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने अटारी ICP को किया बंद, पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा फैसला

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने अटारी ICP को किया बंद, पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा फैसला

अमृतसर के अटारी बॉर्डर पर बनी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट से पाकिस्तान लौटते निवासी। - Dainik Bhaskar

नई दिल्ली, 24 अप्रैल 2025 — जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद, जिसमें 28 पर्यटक मारे गए, भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ व्यापार और आवाजाही के लिए इस्तेमाल होने वाले एकमात्र वैध जमीनी मार्ग, अटारी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) को तत्काल प्रभाव से बंद करने का ऐलान कर दिया है।

पाकिस्तान को आर्थिक झटका देने की तैयारी

सरकार का यह कदम पाकिस्तान को कूटनीतिक और आर्थिक रूप से घेरने की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। अटारी ICP के बंद होने से दोनों देशों के बीच का व्यापार और सीमित नागरिक आवाजाही पूरी तरह से रुक जाएगी। इस फैसले से पाकिस्तान को बड़ा आर्थिक झटका लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

विदेश सचिव की पुष्टि

बुधवार को हुई कैबिनेट सुरक्षा समिति (CCS) की बैठक के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि:

जो यात्री पहले ही वैध दस्तावेजों के साथ पाकिस्तान जा चुके हैं, उन्हें 1 मई 2025 तक भारत लौटने की अनुमति दी गई है। इसके बाद यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाएगा।”

अटारी बॉर्डर पर अफरा-तफरी का माहौल

फैसले के बाद अटारी चेक पोस्ट पर भारी अफरा-तफरी देखी गई।

  • पाकिस्तानी नागरिक जिनके पास वैध वीजा था, उन्हें 48 घंटे के भीतर वापस लौटने के निर्देश दिए गए हैं।

  • वहीं, कई भारतीय परिवार, जो पाकिस्तान जाने के लिए वीजा लेकर पहुंचे थे, उन्हें बॉर्डर से वापस भेज दिया गया

पहले की रौनक, अब सन्नाटा

इससे पहले अटारी चेक पोस्ट पर रोजाना लंबी कतारें लगती थीं —
भारत से पाकिस्तान व्यापारिक सामान भेजने वाले ट्रक, यात्रियों की आवाजाही और लौटते पाकिस्तानी नागरिकों की भीड़ बनी रहती थी। अब इस ऐलान के बाद बॉर्डर पर सन्नाटा पसरा हुआ है।

क्यों है अटारी चेक पोस्ट अहम?

  • अमृतसर से 28 किमी दूर स्थित यह चेक पोस्ट भारत-पाक के बीच व्यापार का एकमात्र वैध जमीनी रास्ता है।

  • 2023-24 में ₹3,886 करोड़ का व्यापार यहीं से हुआ।

  • 71,000 से ज्यादा यात्रियों और करीब 7,000 कार्गो मूवमेंट दर्ज हुए।

राजनीतिक और कूटनीतिक संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल सुरक्षा कारणों से नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक संदेश भी है कि भारत अब आतंकी हमलों पर कठोर प्रतिक्रिया देने को तैयार है।

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