अमृतसर से कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने संसद में मोदी सरकार पर बोला हमला, पहलगाम आतंकी हमले से लेकर गोल्डन टेंपल विवाद तक उठाए तीखे सवाल

अमृतसर से कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने संसद में मोदी सरकार पर बोला हमला, पहलगाम आतंकी हमले से लेकर गोल्डन टेंपल विवाद तक उठाए तीखे सवाल

संसद में बोलते हुए कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला। - Dainik Bhaskar

नई दिल्ली, 29 जुलाई 2025: संसद के मानसून सत्र के दौरान पंजाब के अमृतसर से कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले, सीजफायर नीति, पाकिस्तान और चीन के साथ संबंधों, और यहां तक कि गोल्डन टेंपल से जुड़े विवाद पर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया।

आतंकी हमले पर सरकार की चुप्पी पर सवाल

गुरजीत सिंह औजला ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस हमले में 26 टूरिस्ट मारे गए, लेकिन अब तक न तो हमलावरों की पहचान हुई है और न ही कोई गिरफ्तारी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 100 दिन बीत जाने के बावजूद गृह मंत्री ने इस हमले पर कोई बयान नहीं दिया।

उन्होंने सवाल उठाया, “ये आतंकी आए कहां से, घुसे कैसे? आज तक देश को कोई स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई?”

प्रधानमंत्री की प्राथमिकताओं पर भी उठाए सवाल

औजला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश शोक और चिंता में डूबा था, तब प्रधानमंत्री 24 अप्रैल को बिहार में पंचायत दिवस मना रहे थे। उन्होंने कहा, “ऐसे समय में प्रधानमंत्री को देश के साथ खड़ा होना चाहिए था। पंचायती राज दिवस तो अगले साल भी मनाया जा सकता था।”

गोल्डन टेंपल को लेकर केंद्र पर राजनीतिकरण का आरोप

सांसद औजला ने सदन में गोल्डन टेंपल से जुड़े हालिया विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस पवित्र स्थल को लेकर राजनीति कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि सेना के एक अधिकारी से क्यों यह बयान दिलवाया गया कि गोल्डन टेंपल को निशाना बनाया जाना था?

उन्होंने कहा, “मिलिट्री का राजनीतिकरण किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर अधिकारी बयान दे रहे हैं। ये कौन सी राजनीति खोजी जा रही है?”

सरकार पर सुरक्षा मामलों में राजनीति का आरोप

अपने पूरे भाषण के दौरान औजला ने केंद्र सरकार पर सुरक्षा मामलों पर राजनीति करने और जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने संसद में मांग की कि सरकार पारदर्शिता अपनाए और देश को यह बताए कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इतने गंभीर मामलों में ठोस कार्रवाई कब होगी।

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