अमेरिका से डिपोर्ट हुए भारतीय नागरिकों की स्थिति पर पंजाब मंत्री कुलदीप धालीवाल की आलोचना, परिवारों की एकजुटता और सम्मान की अपील
यह घटना वाकई में बहुत संवेदनशील है और कई राजनीतिक, सामाजिक और मानवीय मुद्दों को उठाती है। अमेरिका से अवैध रूप से रह रहे 116 भारतीयों को जबरन डिपोर्ट किया गया, जिसमें पुरुषों को हथकड़ी लगाकर भेजा गया और महिलाओं तथा बच्चों को छोड़ दिया गया। यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि इस तरह के मामलों में परिवारों को अलग किया जाता है और इस प्रक्रिया में मीडिया से बात करने की अनुमति नहीं दी जाती।
इस बैच में, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे विभिन्न राज्यों के लोग शामिल थे। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह सवाल उठाया था कि जब हरियाणा और गुजरात से अधिक लोग थे, तो अमृतसर एयरपोर्ट पर क्यों उतारा गया, बजाय इसके कि विमान अहमदाबाद या अंबाला में उतरा होता। यह सवाल राजनीतिक विवाद का कारण बन सकता है, खासकर जब देखा जाए कि इस बैच में सबसे अधिक संख्या पंजाबियों की थी।
मंत्री कुलदीप धालीवाल ने हरियाणा सरकार की आलोचना की कि उन्होंने कैदी वैन भेजी, जो इन लोगों के सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने हरियाणा के ट्रांसपोर्ट मंत्री अनिल विज से अपील की कि वे कोई सामान्य बस भेजें, जैसे पंजाब ने अपने नागरिकों के लिए की थी। यह भी संकेत था कि हरियाणा से कोई मंत्री या नेता इस मौके पर नहीं आया, जबकि पंजाब सरकार ने अपने मंत्रियों को भेजा था।
यह पूरा मामला न केवल मानवीय दृष्टिकोण से संवेदनशील है, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह सवाल उठाता है कि इस तरह के मामलों को किस प्रकार से संभाला जाता है। इस स्थिति में परिवारों की एकजुटता और लोगों को सम्मान देने की आवश्यकता है, और यह भी दिखाता है कि हर राज्य की अपनी प्राथमिकताएँ और दृष्टिकोण होते हैं।