इस तकनीक से करें सफेद सोने की खेती, होगी दुगनी पैदावार; मुफ्त में मिल रहा बीज

खरगोन. मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा सफेद सोना यानी कपास का उत्पादन खरगोन में ही होता है. यहां बीटी कपास की पैदावार होती है. जिले में कपास के उत्पादन को बढ़ाने और किसानों को समृद्ध करने के लिए कपास की खेती में नए प्रयोग किए जा रहे हैं. दरअसल, कृषि विभाग द्वारा हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (HDPS) पद्धति के जरिए कपास की बुआई करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इस पद्धति से सामान्य खेती के मुकाबले कपास के उत्पादन में 25 से 30 फीसदी तक वृद्धि होती है. खरगोन के अलावा चीन, गुजरात, महाराष्ट्र में भी इस तरह कपास की खेती होती है.

बीते वर्ष 1045 हेक्टेयर में किसानों ने 5 नई देसी किस्मों की बुआई इस पद्धति से की थी. केंद्रीय कपास अनुसंधान केंद्र नागपुर से कपास की कम फैलने वाली एवं कम बढ़वार वाली देशी किस्में सीएएन 1032 (बीएस), सीएएन 1028 (बीएस), सुरज बीटी (बीएस), रजत बीटी (बीएस), पीकेवी 081 बीटी (बीए) के बीज कृषि विभाग ने उपलब्ध कराए थे. इस साल भी इन्ही किस्मों के बीज किसानों को उपलब्ध कराएंगे.

होगा दुगना उत्पादन!
खरगोन कृषि विभाग के उप संचालक एमएल चौहान ने local 18 को बताया कि खरगोन में कपास का रकबा लगभग 2 लाख 22 हजार हेक्टेयर है. विभाग द्वारा किसानों को अधिक उत्पादन के लिए हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम के तरह बोनी करने की सलाह दी जा रही है. जिले में सामान्य रुप से किसान 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्राप्त करता है, लेकिन एचडीपीएस सिस्टम से नई किस्में लगाने पर 25 से 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्राप्त होता है.

नागपुर से मंगवाए 14 क्विंटल बीज
वर्ष 2022 में इस पद्धति से खेती करने का सुझाव किसनों को दिया गया. पहले साल 120 हेक्टेयर में शुरुआत हुई थी. दूसरे वर्ष 2023 में यह बडकर 1045 हेक्टेयर हो गया था. इस साल टारगेट 5000 हेक्टेयर का है. राष्ट्रीय कपास अनुसंधान केंद्र नागपुर से 14 क्विंटल बीज की व्यवस्था भी कर ली गई. बीज किसानों को विभाग द्वारा नि:शुल्क दिए जाएंगे. बीज कंपनियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि चिन्हित 5 किस्मों के बीजों का भंडारण करें और समय पर किसानों को उपलब्ध कराएं.

क्या होती है HDSP प्रणाली
उप संचालक एमएल चौहान ने बताया कि सामान्य रूप से किसान खेतो में पौधे से पौधे की दूरी 3 से 4 फिट रखते हैं, जबकि हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम के तहत यह दूरी घटकर 15 से 20 Cm होती है. लाइन से लाइन की दूरी 60 से 90 Cm होती है. सामान्य खेती में एक हेक्टेयर में 22 से 25 हजार तक पौधे लगाता है. परंतु इस पद्धति में 55 से 60 हजार तक पौधों की संख्या होती है. पौधे की संख्या बड़ने से पैदावार भी बढ़ती है. उत्पादन अधिक होता है. किसानों की आय दुगनी होती है.

पौधे की बड़वार रोकने की तकनीक
हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम के अंतर्गत इस साल दो नई तकनीक भी अपनाई जाएंगी. इससे पौधे की बड़वार को और कम किया जा सकेगा. इसके लिए दो बार प्लांट की ग्रोथ को कंट्रोल किया जाएगा. इसके लिए लोयोसिन का उपयोग करने की सलाह देंगे. पहली बार 40 से 45 दिन और दूसरी बार 60 से 65 दिन बाद इसका उपयोग करना है. इसके अलावा प्लांट से प्लांट की दूरी को कम रखने की सलाह दी जाएगी.

9000 किसान चयनित
किसनों के चयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. 9000 किसानों को 5000 हेक्टेयर के लिए बीज उपलब्ध कराए जाएंगे. 8 मई तक चयनित किसानों की ट्रेनिंग होगी. 25 जून के पहले तक किसानों को बीज वितरण भी कर दिया जाएगा. ताकि किसान समय पर बुआई कर सकें.

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