रोहित भट्ट /अल्मोड़ा: उत्तराखंड में वनाग्नि की घटनाएं हर साल बढ़ती ही जा रही है. इस वजह से कई हेक्टेयर जंगल जलकर खाक हो जाते हैं. ऐसे में फल-फूल, पशु-पक्षी समेत अब इंसान भी इस आग का शिकार हो रहे हैं. अल्मोड़ा जिले की बात करें तो यहां वनाग्नि की घटनाएं बढ़ती ही गई है. LOCAL 18 की टीम ने जंगलों की आग के बढ़ते मामले को लेकर अल्मोड़ा के वन विभाग कार्यालय से आंकड़े जुटाने की कोशिश की. इस दौरान पता चला कि साल 2023 में 144 घटनाएं और 195.75 हेक्टेयर जंगल जले, तो इस साल 163 वनाग्नि की घटना सामने आई है, जिसमें 296.3 हेक्टेयर जंगल जलकर खाक हुए.
लोकल 18 से खास बातचीत करते हुए डीएफओ दीपक सिंह ने बताया कि इस बार बारिश न के बराबर हुई. इस वजह से हीट वेव के साथ जंगलों की आग ज्यादा देखने को मिली. बारिश नहीं होने की वजह से पूरे फायर सीजन जंगलों की आग की घटना सामने आई. उन्होंने बताया कि इस साल 296.3 हेक्टेयर जंगल जला है, जिसमें 163 वनाग्नि की घटनाएं सामने आई. जहां आग लगी वह फॉरेस्ट एरिया के अलावा रिजर्व फॉरेस्ट, वन पंचायत और सिविल फॉरेस्ट भी है. उनका मानना है कि 70 फ़ीसदी आंकड़े इस साल बढ़े हैं. उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में बारिश होने की वजह से थोड़ी राहत है. अल्मोड़ा में भी बारिश होने से वनाग्नि की घटनाएं लगभग- लगभग खत्म हो चुकी है.
अगली बार जोड़े जाएंगे उपकरण
डीएफओ दीपक सिंह ने बताया कि पूरे प्रदेश के साथ विभिन्न जिलों में जंगलों की आग को उच्च अधिकारियों के अलावा वन विभाग के अधिकारियों के साथ कर्मचारी भी इसके बारे में विचार विमर्श करेंगे. उनका मानना है जो इस साल कमी रह गई, उसे अगले साल सुधार किया जाएगा. उच्च अधिकारियों के साथ वार्ता करके फायर सीजन के लिए एक प्लान तैयार किया जाएगा. आगे उन्होंने बताया कि वन विभाग के पास फायर टेंडर नहीं है. इसको देखते हुए उच्च अधिकारियों को इसके लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा और फायर के लिए कई अन्य उपकरण भी जोड़े जाएंगे.
FIRST PUBLISHED : June 27, 2024, 10:55 IST










