एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी के इस्तीफे पर बैठक, चर्चा का केंद्र बनेगा इस्तीफा मंजूरी
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के इस्तीफे के बाद आज पहली बार कार्यकारिणी सदस्यों की बैठक हो रही है, जिसमें मुख्य रूप से इस इस्तीफे पर चर्चा की जाएगी। बैठक का अहम मुद्दा यह तय करना होगा कि उनका इस्तीफा मंजूर होगा या नहीं।
धामी ने अपना इस्तीफा तीन दिन पहले श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यालय में सौंपा था, और उन्होंने इस्तीफे की वजह श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह का पद बताया। ज्ञानी रघबीर सिंह ने 13 फरवरी को हरप्रीत सिंह को श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार पद से हटाए जाने के बाद एक पोस्ट शेयर की थी, जिसे धामी ने अपनी इस्तीफे की वजह बताया।
इस इस्तीफे को पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि ज्ञानी रघबीर सिंह की पोस्ट से साफ है कि हरप्रीत सिंह को हटाए जाने की वजह यही थी। ज्ञानी हरप्रीत सिंह को एसजीपीसी ने करीब 10 दिन पहले पद से हटा दिया था।
धामी ने अपने इस्तीफे के समय कहा था कि जब हरप्रीत सिंह को हटाने का फैसला लिया गया, उस समय 14 एग्जीक्यूटिव सदस्य उपस्थित थे और डेढ़ घंटे तक चर्चा हुई थी, जिसमें सभी को बोलने का मौका दिया गया। लेकिन उन्होंने नैतिकता के कारण इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
धामी ने यह भी कहा कि एसजीपीसी सिखों की प्रबंधकीय संस्था है और श्री अकाल तख्त साहिब सिखों का सर्वोच्च तख्त है। उनका मानना है कि हरप्रीत सिंह को पद से हटाना न केवल गलत था बल्कि यह तख्त साहिबों के अस्तित्व को भी नुकसान पहुँचाने वाला कदम था। उन्होंने यह भी बताया कि सिंह साहिब के खिलाफ 18 साल पुराने पारिवारिक मामले को गलत तरीके से उठाकर मीडिया ट्रायल किया गया, जो उन्होंने गलत माना था।
धामी ने इसे एक योजनाबद्ध कदम बताया और कहा कि यह तख्त साहिबों को अपमानित करने वाला और सिख पंथ की परंपराओं के खिलाफ था।
अब देखना यह है कि इस बैठक में किस प्रकार का निर्णय लिया जाता है और धामी के इस्तीफे को मंजूरी मिलती है या नहीं।