ऐसे तो विलुप्त हो जाएगी…, सरकार पर क्यों खफा हो गया सुप्रीम कोर्ट, करप्ट अफसरों को दी नसीहत

नई दिल्ली. अरावली क्षेत्र में लगातार अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. शीर्ष कोर्ट अरावली पर्वतमाला में कथित अवैध खनन मामले पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से अवैध खनन रोकने का आदेश जारी किया है. अदातल ने लगातार विलुप्त हो रहे पहाड़ियों को राजस्थान सरकार को निर्देश दिया है. खनन न रोके जाने के सूरत में दोषी अफसरों पर कार्रवाई के भी आदेश दिए गए हैं. कोर्ट ने कहा कि सतत विकास और पर्यावरण की सुरक्षा के बीच संतुलन बने रहना काफी जरूरी है.

शीर्ष कोर्ट के जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस अभय एस ओक की पीठ ने कहा अरावली क्षेत्र में अवैध खनन को रोकने के लिए केंद्र के साथ राज्य सरकारों के लिए आदेश जारी किए हैं, मालूम हो अरावली का अधिकतम क्षेत्र राजस्थान में ही आता है. साल 2018 में राजस्थान के अरावली क्षेत्र में 31 पहाड़ियों के गायब होने पर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई थी. उसी समय से अवैध खनन पर प्रतिबंध लगाए जाने की कवायद जारी है.

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कोरी संरचनाएं होने से क्या फायदा
पीठ ने गुरुवार को अरावली पर्वतमाला में कथित अवैध खनन मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि अवैध खनन को रोकना होगा, अन्यथा पहाड़ों के नाम पर केवल कोरी संरचनाएं होने से क्या फायदा होगा? कोर्ट सरकारों (केंद्र और राज्य) को आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया और कहा कि यह सुनिश्चित हो कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.

पहाड़ी और पर्वतमाला में अंतर जरूरी
दरअसल 2009 में, अदालत ने पर्यावरण के प्रति संवेदनशील अरावली पहाड़ियों में प्रमुख और छोटे खनिजों के खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था . राजस्थान सरकार ने पहले अदालत से कहा था कि जहां तक खनन गतिविधियों का सवाल है, अरावली पहाड़ियों और अरावली पर्वतमाला के बीच वर्गीकरण के मुद्दे पर फैसला देने की जरूरत है.

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सरकार, चाहे तो रोक लगा दे
लेकिन अदालत ने कहा था कि हम प्रथम दृष्टया महसूस करते हैं कि यदि राज्य सरकार मानती है कि अरावली रेंज में खनन गतिविधियां पर्यावरण हित के लिए भी हानिकारक हैं, तो राज्य सरकार को अवैध खनन को रोकना चाहिए.

Tags: Aravali hills, Supreme Court

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