क्या है वो केनाई रोटी, जिसको दुनिया में कहा जाता है बेस्ट, भारत के साथ क्या रिश्ता

हाइलाइट्स

इसे दुनिया की सबसे जायकेदार और शानदार रोटी मानते हैंइसे केनाई रोटी तो कहीं चेनई रोटी तो कहीं चेन्नई रोटी या केनाई पराठा भी कहते हैंये कई देशों में लोकप्रिय हो चुकी है, भारत की लच्छा रोटी जैसी लेकिन बहुत पतली

रोटी कनाई को हाल में टेस्ट एटलस द्वारा दुनिया की सबसे अच्छी रोटी या ब्रेड बताया गया. इसका अर्थ होता है पतला बेलना. आप हैरान हो सकते हैं कि ये रोटी बेशक भारत में नहीं बनती लेकिन इसका रिलेशन भारतीयों से ही है. उन्होंने ही सदियों पहले ईजाद किया था. रोटी कनाई आटे, पानी, अंडे और घी या तेल से बनी एक परतदार सपाट रोटी है. इसे कनाई पराठा भी कहा जाता है.

अब ये रोटी मलेशिया की पहचान मानी जाती है. माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति भारत में हुई जब 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश उपनिवेश के दौरान भारतीय मजदूर मलेशिया गए चले गए तो इसकी विधि वहां लेकर गए. धीरे धीरे ये वहां तो पापुलर हो गई. सिंगापुर में भी ये खूब फेमस है लेकिन भारत में जरूर इसका लोप हो गया या इसका तरीका बदल गया.

करी के साथ परोसी जाती है
ये रोटी मलेशिया और सिंगापुर में प्रमुख नाश्ता और स्नैक फूड है, जिसे अक्सर करी के साथ परोसा जाता है. वैसे दुनिया में सैकड़ों तरह से रोटियां बनाई जाती हैं. खुद भारत में ही करीब 150 से ज्यादा तरह की सपाट रोटियां बनाई जाती हैं.

केनाई रोटी को बनाने की प्रक्रिया (Photo: @breadetbutter / Instagram)

रोटी कनाई को दुनिया की सबसे अच्छी ब्रेड में एक माना जाता है, मलेशिया में कहीं कहीं इसे “चेन्नई रोटी” भी कहते हैं. बेशक इस व्यंजन की जड़ें भारत में हैं लेकिन ये मलेशियाई खाद्य संस्कृति का प्रिय हिस्सा बन गया है.

चपटी, गोलाकर और कुरकुरी 
ये गोलाकार, चपटी और कुरकुरी होती है. मलेशिया और सिंगापुर में अगर ये नाश्ते में सबसे ज्यादा पसंद की जाती है तो वहां इसे दोपहर के भोजन और रात के खाने के साथ भी खाते हैं. इसकी असली ताकत इसके खास तरह से गूंथन और फिर बनाने में है.

सिंगापुर में इसे कहते हैं रोटी पराटा 
सिंगापुर में इस व्यंजन को रोटी पराटा के नाम से जाना जाता है, जो भारतीय पराठा या परोटा से काफी मिलता-जुलता है . हिंदी शब्द “पराठा” का अर्थ है चपटा. माना जाता है कि रोटी केनाई के सबसे करीब मालाबार या केरल का पराठा है. दक्षिण भारतीय व्यंजनों में इसे कूर्मा पराठा भी कहते हैं.

ये रोटी काफी हद तक मालाबार की विशिष्ट रोटी की तरह है और यहीं से कई देशों में सदियों पहले पहुंची. (Photo: @breadetbutter / Instagram)

सदियों पहले बाहर गए तमिलों ने इसे शुरू किया
चूंकि बड़े पैमाने पर तमिल सदियों पहले इंडोनेशिया भी गए,लिहाजा ये व्यंजन वहां भी उतना ही लोकप्रिय है, जिसे अक्सर “रोटी केन” लिखा जाता है. आमतौर पर इसे करी काम्बिंग (मटन करी) के साथ परोसा जाता है.

कैसे मलेशिया पहुंची ये रोटी
मलेशिया में रोटी केनाई का अस्तित्व प्रायद्वीप के ब्रिटिश उपनिवेशीकरण से जुड़ा हुआ है. हालांकि भारतीय बहुत पहले से मलेशिया जाते रहे हैं. 10वीं शताब्दी के दौरान मलेशिया और इंडोनेशिया में भारतीयों के रहने और आने जाने के प्रमाण हैं. जब अंग्रेज़ आए तो भारतीयों का मलेशिया जाना और बढ़ गया.

20वीं सदी के अंत में ब्रिटिश मलाया में बड़ी संख्या में भारतीयों के आने के साथ, पहले रबर के बागानों और बाद में पाम ताड़ के बागानों में काम करने वालों के लिए भारतीय स्ट्रीट वेंडर्स ने इसे बेचना शुरू किया. 1920 के दशक तक ये रोटी पूरे मलाया प्रायद्वीप में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में परोसी जाने लगी.

केनाई रोटी के बीच अंडे की स्टफिंग. अब इन रोटियों को कई तरह की स्टफिंग के साथ बनाया जाने लगा है. (wiki commons)

यह कैसे बनती है, बनाने का तरीका खास
रोटी केनाई के आटे में मुख्य रूप से आटा, पानी (या दूध), नमक, थोड़ी चीनी और ढेर सारा घी होता है, जो कि शुद्ध मक्खन के रूप में होता है. इन्हें तब तक गूंथा जाता है जब तक कि ये आटे में तरीके से मिल नहीं जाए. फिर इसे कुछ देर के लिए रखकर फिर गूंथते और फिर रख देते हैं. फिर इसे रस्सी की तरह बनाकर गोलाकार काटते हैं. बॉल्स पर और घी (या तेल) लगाया जाता है, गीले तौलिये से ढक दिया जाता है. तीसरी बार भी इसे आराम करने देते हैं.

जब इसे बनाना होता है तो फिर हर बॉल्स को कई बार खींचकर चपटा करते हैं ताकि ये खाते समय अलग अलग परतों में रहें. अगर आपने लच्छा पराठा खाया हो तो ये करीब उसी तरह की मान सकते हैं. इसे इस तरह बेलते हैं कि कि ये कागज जितनी पतली हो जाती है. जब इसे पकाते हैं तो ये फूली, परतदार और कुरकुरी होती है, जो अंदर से नरम और चबाने में कुछ क्रिस्पी होती है.

रोटी केनाई भारत के होटलों में परोसी जाने वाले लच्छा पराठा की तरह है लेकिन उनसे कहीं ज्यादा पतली और परतदार होती है. (wiki commons)

मलेशिया ये जीवन और संस्कृति का हिस्सा
मलेशिया में ये ममक स्टॉल्स में हमेशा उपलब्ध रहती है, इसे मांस-आधारित या दाल करी के साथ परोसा जाता है. दक्षिण एशिया में रोटी एक साइड डिश से ज़्यादा कुछ नहीं है, लेकिन मलेशिया में स्थानीय लोगों ने इसे बनाने और स्वाद के अनगिनत तरीकों के साथ अपने आप में एक भोजन बना लिया है – जो देश की खाद्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है.

ये हर तरह की स्टफिंग के साथ भी
मलेशियाई रोटी केनाई हर तरह की स्टफिंग के साथ आती है. इसके जाने-पहचाने रूपों में रोटी टेलुर (खाना पकाने से पहले अंडे के साथ सानते हैं), रोटी पिसांग (कटे हुए क्रीमयुक्त पिघले केले के साथ) और रोटी सुसु (चीनी छिड़की जाती है और डुबोने के लिए गाढ़े दूध के साथ परोसा जाती है) शामिल हैं. कुल मिलाकर इसकी तमाम किस्में होती हैं.

मलेशिया में ये रोटी केवल खाने की चीज़ नहीं है, बल्कि ये जीवन जीने का एक तरीका है. मलेशिया में सभी तरह के लोग इसको पसंद करते हैं.

Tags: Food, Food business

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