चंडीगढ़ नगर निगम में भर्ती और फंड गड़बड़ी पर विजिलेंस की नजर, कमिश्नर से मांगा पूरा रिकॉर्ड

चंडीगढ़: चंडीगढ़ नगर निगम में आउटसोर्सिंग के जरिए चहेतों को नौकरियां देने और सरकारी फंड में गड़बड़ी के आरोपों की जांच अब विजिलेंस विभाग ने शुरू कर दी है। इस मामले में समाज अधिकार कल्याण पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंभू बनर्जी द्वारा की गई शिकायत के आधार पर नगर निगम कमिश्नर से पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है।
क्या हैं आरोप?
शंभू बनर्जी ने आरोप लगाया है कि:
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पिछले 2-3 वर्षों में आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है।
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पहले जहां हर महीने लगभग 5 करोड़ रुपये कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होते थे, अब यह राशि 15 करोड़ रुपये प्रति माह हो गई है।
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भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है—अधिकांश कर्मचारी अधिकारियों, निगम कर्मियों या पार्षदों के करीबी हैं।
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कई ऐसे लोग भी भर्ती किए गए हैं जो योग्यता परीक्षण में पास नहीं हो सकते या बिना किसी टेस्ट के ही नौकरी पर रखे गए हैं।
शंभू बनर्जी का बयान:
“नगर निगम में जनता के टैक्स के पैसों का खुला दुरुपयोग हो रहा है। यह फंड जनता की सेवा के लिए है, न कि चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।”
विजिलेंस की कार्रवाई
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए:
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मामला चंडीगढ़ प्रशासन के एडवाइजर तक पहुंचाया गया।
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अब विजिलेंस विभाग ने नगर निगम कमिश्नर को निर्देश दिए हैं कि वे इस मामले से संबंधित संपूर्ण दस्तावेज और नियुक्ति रिकॉर्ड प्रस्तुत करें।
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जांच में यह देखा जाएगा कि भर्ती प्रक्रिया में कोई नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं, और सरकारी फंड का दुरुपयोग कैसे और कहां हुआ।










