चंडीगढ़ बुड़ैल जेल प्रशासन के खिलाफ एनआईए कोर्ट का सख्त रुख, आरोपी को बिना कोर्ट इजाजत के शिफ्ट किया गया

चंडीगढ़ बुड़ैल जेल प्रशासन के खिलाफ एनआईए कोर्ट का सख्त रुख, आरोपी को बिना कोर्ट इजाजत के शिफ्ट किया गया

चंडीगढ़ बुड़ैल मॉडल जेल। - Dainik Bhaskar

चंडीगढ़ के बुड़ैल मॉडल जेल प्रशासन द्वारा एक एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) के हाई प्रोफाइल केस के आरोपी को बिना कोर्ट की इजाजत के दूसरी जेल में शिफ्ट करने का मामला अब विवादों में आ गया है। एनआईए की विशेष अदालत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए जेल सुपरिंटेंडेंट को नोटिस जारी किया है और 25 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

क्या था मामला?

जनवरी 2024 में सेक्टर-5 स्थित कोयला कारोबारी की कोठी पर फायरिंग और फिरौती मांगने के मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। कमलदीप सिंह, जो इस मामले में आरोपी था, को बिना कोर्ट की अनुमति के होशियारपुर जेल भेज दिया गया। जब अदालत ने इस बारे में सवाल उठाया, तो पता चला कि जेल प्रशासन ने उसे चुपचाप ट्रांसफर कर दिया था, जो कि अदालत की अनुमति के बिना किया गया कदम था। इस पर अदालत ने गहरी नाराजगी जताते हुए बुड़ैल जेल सुपरिंटेंडेंट को नोटिस जारी किया है।

कोर्ट ने क्या कहा?

एनआईए अदालत ने जेल प्रशासन से जवाब तलब किया है कि आरोपी को कोर्ट की अनुमति के बिना क्यों शिफ्ट किया गया। अदालत ने 25 अप्रैल तक लिखित जवाब देने का निर्देश दिया है।

एनआईए कोर्ट में ट्रायल की शुरुआत

इस फिरौती मांगने और फायरिंग के मामले में एनआईए ने अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर कुछ दिन पहले आरोप तय किए गए थे। ट्रायल शुक्रवार से शुरू हुआ, लेकिन जब अदालत में कमलदीप सिंह को पेश नहीं किया गया, तो अदालत ने कारण पूछा। इसके बाद खुलासा हुआ कि जेल प्रशासन ने आरोपी को बिना कोर्ट की अनुमति के होशियारपुर जेल में ट्रांसफर कर दिया था।

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से कनेक्शन

इस हाई प्रोफाइल मामले की शुरुआत में चंडीगढ़ पुलिस जांच कर रही थी, लेकिन जब मामले में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के कनेक्शन का पता चला, तो जांच को एनआईए को सौंप दिया गया। इसमें फॉरेन नंबर से कॉल कर फिरौती की मांग की गई थी। अब एनआईए की जांच अपने निर्णायक मोड़ पर है और मामले में कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है।

आगे की कार्रवाई

अब एनआईए और जेल प्रशासन दोनों के लिए यह मामला महत्वपूर्ण हो गया है। एनआईए की जांच और अदालत की कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि बिना कोर्ट की इजाजत के किसी आरोपी को शिफ्ट करना न सिर्फ कानूनी रूप से गलत है, बल्कि इससे न्यायिक प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है।

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