डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड का कचरे का पहाड़ बनी चुनौती, स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में चंडीगढ़ की रैंकिंग पर असर

स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 की रैंकिंग जनवरी में घोषित की जाएगी, लेकिन चंडीगढ़ के लिए डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड का कचरे का पहाड़ एक बड़ी बाधा बना हुआ है। स्वच्छता रैंकिंग के लिए मिनिस्ट्री ऑफ अर्बन डवेलपमेंट ने तीन फेज में सर्वे पूरा कर लिया है, लेकिन इस बार भी डड्डूमाजरा के कचरे का पहाड़ चंडीगढ़ की रैंकिंग को प्रभावित कर सकता है।
पिछले साल चंडीगढ़ ने चार में से तीन कैटेगरी में अच्छी रैंकिंग प्राप्त की थी, लेकिन गारबेज फ्री सिटी कैटेगरी में डड्डूमाजरा के कचरे के पहाड़ ने शहर की रैंकिंग को नीचे खींच लिया था। चंडीगढ़ में हर दिन लगभग 500 टन कचरा निकलता है, जिसमें से 100 टन गीला और सूखा कचरा बिना सैग्रिगेशन के डंप किया जा रहा है, जिससे स्वच्छता की स्थिति पर असर पड़ता है।
शहर में 500 टन कचरे के डिस्पोजल के लिए नया प्लांट, टेंडर के बावजूद काम में देरी
चंडीगढ़ में 500 टन कचरे के डिस्पोजल के लिए नया प्लांट लगाने का टेंडर तो हो चुका है, लेकिन अब तक इस परियोजना पर काम शुरू नहीं हो सका है। इस प्लांट में हर दिन 400 टन कचरे को प्रोसेस करने की योजना थी, जिससे रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ) और कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) बनाया जा सके। हालांकि, टेंडर की प्रक्रिया के बाद भी इस महत्वाकांक्षी परियोजना में देरी हो रही है, जिससे शहर के कचरे के निस्तारण के उपायों में बाधा उत्पन्न हो रही है।

चंडीगढ़ प्रशासन ने एनजीटी को गलत डेटा भेजा, 12 दिसंबर तक नई रिपोर्ट मांगी
चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) को पेश किया गया डेटा गलत पाया गया है। पिछली सुनवाई में प्रशासन ने दावा किया था कि शहर से हर दिन 500 टन कचरा निकलता है, जबकि असली आंकड़ा 550 टन था। इसके अलावा, रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ) प्लांट और कंपोस्टिंग के बारे में भी सही जानकारी नहीं दी गई थी। इस पर एनजीटी ने चंडीगढ़ प्रशासन से 12 दिसंबर तक नई और सही रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
स्वच्छता सर्वेक्षण 2024: चंडीगढ़ प्रशासन को 12 दिसंबर तक एनजीटी में बेहतर रिपोर्ट पेश करने का मौका
स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन के कार्यों का मूल्यांकन किया गया। इसमें प्रमुख बिंदु थे:
- ओपन डिफेक्शन फ्री सिटी: शहर की सफाई व्यवस्था का निरीक्षण।
- वेस्ट मैनेजमेंट: कचरे की कलेक्शन, ट्रांसपोर्टेशन और डिस्पोजल प्रक्रिया।
- सार्वजनिक शौचालय: सार्वजनिक और निजी स्थानों पर शौचालयों की उपलब्धता।
- फीडबैक: नागरिकों से फोन पर सफाई व्यवस्था के बारे में फीडबैक लिया गया।
- सैग्रिगेशन चेक: कचरे को अलग-अलग करने और रिसाइक्लिंग सिस्टम की जांच की गई।
अब चंडीगढ़ प्रशासन के पास 12 दिसंबर तक एनजीटी को सुधारात्मक रिपोर्ट पेश करने का अवसर है, जिससे स्वच्छता रैंकिंग में सुधार किया जा सके।










