तरनतारन फर्जी एनकाउंटर केस: CBI कोर्ट ने पूर्व SSP-DSP समेत 5 पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया, सोमवार को होगी सजा

तरनतारन फर्जी एनकाउंटर केस: CBI कोर्ट ने पूर्व SSP-DSP समेत 5 पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया, सोमवार को होगी सजा

1993 फर्जी एनकाउंटर मामले में मारे गए लोगों के परिजन अपना दुख सुनाते हुए। - Dainik Bhaskar

तरनतारन/चंडीगढ़, 1 अगस्त 2025:
पंजाब के तरनतारन जिले में साल 1993 में हुए फर्जी एनकाउंटर केस में CBI की विशेष अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए तत्कालीन एसएसपी, डीएसपी और तीन अन्य पुलिस अधिकारियों को दोषी करार दिया है। अदालत अब 5 अगस्त (सोमवार) को दोषियों को सजा सुनाएगी

दोषी ठहराए गए अधिकारियों में शामिल हैं:

  • रिटायर्ड एसएसपी भूपेंद्रजीत सिंह

  • रिटायर्ड डीएसपी दविंदर सिंह

  • रिटायर्ड इंस्पेक्टर सूबा सिंह

  • रिटायर्ड इंस्पेक्टर रघुबीर सिंह

  • रिटायर्ड इंस्पेक्टर गुलबर्ग सिंह

इन सभी पर IPC की धारा 302 (हत्या) और 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत सजा तय होगी। फैसले के तुरंत बाद सभी दोषियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।


क्या था मामला?

वर्ष 1993 में तरनतारन जिले के थाना वैरोवाल और थाना सहराली में दो अलग-अलग पुलिस मुठभेड़ों की एफआईआर दर्ज की गई थीं। इन कथित मुठभेड़ों में सात नौजवानों को आतंकी बताकर मुठभेड़ में मारे जाने की कहानी गढ़ी गई थी।

CBI जांच और कोर्ट में पेश सबूतों से यह साफ हो गया कि:

  • युवकों को घरों से उठाया गया था

  • उन्हें कई दिनों तक अवैध हिरासत में रखा गया

  • थानों में यातनाएं दी गईं, और

  • घर ले जाकर जबरन नकली रिकवरी भी करवाई गई

  • अंत में फर्जी मुठभेड़ों में गोली मारकर हत्या कर दी गई

इन घटनाओं को पुलिस ने आतंकी मुठभेड़ के रूप में दर्ज किया था, मगर अदालत ने इसे झूठा और साजिशन हत्या माना।


परिवारों ने फैसले पर जताई संतुष्टि

पीड़ित युवाओं के परिवारों ने कोर्ट के इस फैसले पर संतोष और आंशिक न्याय की भावना व्यक्त की है।
एक पीड़ित परिवार के सदस्य ने कहा:

“हमने तीन दशक तक इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ी। यह फैसला हमारे जख्मों पर मरहम तो नहीं, लेकिन एक उम्मीद जरूर है कि कानून के हाथ लंबे हैं।”


न्याय व्यवस्था पर महत्वपूर्ण टिप्पणी

इस फैसले को पंजाब पुलिस की कथित फर्जी मुठभेड़ों और मानवाधिकार हनन के मामलों में एक नजीर के रूप में देखा जा रहा है। यह संदेश है कि संविधान और कानून के खिलाफ जाकर किसी निर्दोष की जान लेने वाले अधिकारियों को भी एक दिन जवाबदेह बनना ही पड़ेगा।

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