पंजाब के स्कूलों में अब चलेगी ‘नशा मुक्ति की क्लास’, केजरीवाल-मान ने की ऐतिहासिक पहल की शुरुआत
चंडीगढ़, 1 अगस्त 2025: पंजाब सरकार ने स्कूली छात्रों को नशे से दूर रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘नशा मुक्ति’ विषय को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कर दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आज इस नई पहल की औपचारिक शुरुआत की।
अब 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को हर 15 दिन में 35 मिनट की विशेष कक्षा दी जाएगी, जिसमें उन्हें फिल्मों, क्विज़ और खेलों के माध्यम से यह सिखाया जाएगा कि नशे से दूर क्यों रहना जरूरी है और कैसे इससे बचा जा सकता है। यह कक्षाएं सबसे पहले सरकारी स्कूलों में शुरू होंगी और बाद में प्राइवेट स्कूलों व कॉलेजों में भी लागू की जाएंगी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उपस्थित छात्रों और शिक्षकों को नशा न करने की शपथ दिलाई। वहीं, अरविंद केजरीवाल ने अपनी जोरदार स्पीच में इस अभियान की ज़रूरत और पृष्ठभूमि को विस्तार से समझाया।
केजरीवाल की स्पीच के मुख्य बिंदु:
1. “पंजाब में मंत्री करते थे नशा सप्लाई”
केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में नशे की जड़ें गहरी हैं और यह समस्या 2007–2008 से लगातार बढ़ती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पिछली सरकारों के मंत्री खुद नशा सप्लाई करते थे और अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों को अपने घरों में पनाह देते थे।
2. “नशे की कमाई से बनी इमारतों पर चल रहा बुलडोज़र”
उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक 23,000 से अधिक एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और नशे के कारोबार से बनाई गई संपत्तियों को ध्वस्त किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अब तक एक बड़े नेता को भी जेल भेजा गया है, जिससे लोगों को “आत्मिक संतोष” मिला है, जबकि विपक्षी दल उसके समर्थन में खड़े हो गए हैं।
3. “बच्चों को बनना है भविष्य का मुख्यमंत्री, तो नशे से रहें दूर”
केजरीवाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि वे भविष्य के मुख्यमंत्री, डॉक्टर, इंजीनियर और लीडर हैं — लेकिन यह तभी संभव है जब वे नशे से बचें। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने स्कूलों को बर्बाद कर दिया था, लेकिन अब शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
अभियान की अगली दिशा
पंजाब सरकार का यह कदम ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य है राज्य को नशा मुक्त बनाना। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान के तहत लगातार छापेमारी और कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
इस नई पहल को शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और अभिभावकों से सराहना मिल रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि इससे स्कूली छात्रों में नशे के खिलाफ चेतना बढ़ेगी और पंजाब का भविष्य सुरक्षित रहेगा।