पंजाब में पानी की गंभीर स्थिति और कृषि संकट: मुख्यमंत्री भगवंत मान की अपील
पंजाब में पानी की गंभीर स्थिति और इसके कृषि पर प्रभाव को दर्शाता है। पंजाब में पानी की कमी का मुद्दा बहुत गहरा हो चुका है, खासकर राज्य के भूजल स्तर में गिरावट के कारण। यहां के 76.5 प्रतिशत ब्लॉकों में पानी का अत्यधिक दोहन हो रहा है, जो कि गंभीर चिंता का विषय है। इसके बावजूद, पंजाब देश के खाद्यान्न उत्पादन में अहम भूमिका निभा रहा है, खासकर गेहूं और चावल के उत्पादन में।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रावी और ब्यास नदी के जल बंटवारे की चिंता उठाई है और यमुना नदी के पानी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यमुना के पानी का बंटवारा पंजाब के हिस्से में नहीं किया गया, जबकि ऐतिहासिक रूप से यह नदी पंजाब के क्षेत्र से गुजरती थी।
मुख्यमंत्री ने किसानों को गेहूं-धान के चक्र से बाहर निकलने और फसल विविधीकरण की दिशा में प्रेरित करने की कोशिश की है। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार से वैकल्पिक फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रदान करने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब के किसानों को पराली जलाने के आरोपों से बाहर करने की भी अपील की, क्योंकि यह कदम खाद्य उत्पादन में देश की आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
संक्षेप में, यह स्थिति पंजाब में पानी की कमी और किसानों की मेहनत के बीच संघर्ष को उजागर करती है, साथ ही राज्य की कृषि और खाद्यान्न सुरक्षा के लिए केंद्र और अन्य राज्यों से समर्थन की आवश्यकता को भी दर्शाती है।