पंजाब में OSD नियुक्ति पर सियासी बवाल, बाजवा और बलबीर सिंह आमने-सामने

पंजाब में OSD नियुक्ति पर सियासी बवाल, बाजवा और बलबीर सिंह आमने-सामने

पंजाब के सेहतमंत्री डॉ. बलबीर सिंह, शिक्षामंत्री हरजोत सिंह बैंस व कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा। - Dainik Bhaskar

चंडीगढ़ – पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के नए OSD (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) शालीन मित्रा की नियुक्ति ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस नेता और नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने इसे लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है और सवाल उठाया है कि क्या पंजाब को अब भी दिल्ली से रिमोट कंट्रोल किया जा रहा है?

बाजवा का आरोप: “दिल्ली के लोगों को दे रहे हैं पंजाब की नौकरियां”

प्रताप सिंह बाजवा ने सोशल मीडिया मंच X (पूर्व में ट्विटर) पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए लिखा –
“पंजाब सरकार ने दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येन्द्र जैन के पीए शालीन मित्रा को स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह का OSD नियुक्त किया है। क्या यह पद पंजाबियों के लिए था या दिल्ली वालों के लिए इनाम?”
उन्होंने आगे कहा, “सीएम भगवंत मान ने पंजाब को दिल्ली के सामने समर्पित कर दिया है।”

बलबीर सिंह का पलटवार: “तो आपने तो पंजाब को पाकिस्तान को सौंप दिया था”

कांग्रेस के इस आरोप पर स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने भी तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा –
“अगर इस तर्क से बात करें तो आपने (बाजवा) तो पंजाब को पाकिस्तान को सौंप दिया था। पाकिस्तानी महिला अरूसा आलम से लेकर प्रशांत किशोर (बिहार) और भूपेश बघेल (छत्तीसगढ़) तक को आपने पंजाब की राजनीति में घसीटा।”

बलबीर सिंह ने यह भी कहा कि काबिल व्यक्ति को नियुक्त करना सरकार का विशेषाधिकार है, और OSD की भूमिका प्रशासनिक होती है, न कि राजनीतिक।


क्या है पूरा मामला?

  • शालीन मित्रा, जो दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येन्द्र जैन के निजी सहायक रह चुके हैं, को पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री का OSD नियुक्त किया गया है।

  • इस पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं कि क्या पंजाब में सक्षम लोग नहीं हैं जो दिल्ली से लोगों को लाकर नियुक्तियां की जा रही हैं।

  • कांग्रेस इसे “पंजाब की स्वायत्तता पर हमला” बता रही है।


राजनीति बनाम प्रशासन

OSD की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या राज्य सरकारें दिल्ली पर आश्रित होती जा रही हैं, विशेषकर जब केंद्र या राष्ट्रीय पार्टी से जुड़ी राज्य सरकारें होती हैं।

निष्कर्ष

यह मामला सिर्फ एक नियुक्ति का नहीं, बल्कि राजनीतिक नियंत्रण, स्वायत्तता और ‘बाहरी बनाम स्थानीय’ की बहस को जन्म दे चुका है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है, खासकर जब पंजाब में अन्य संवेदनशील नियुक्तियों पर भी सवाल उठने लगें।

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