पंजाब यूनिवर्सिटी में हिंसा और हथियारों को बढ़ावा देने वाले गाने पर हाईकोर्ट का बड़ा कदम, अधिकारियों को नोटिस
पंजाब यूनिवर्सिटी के शो में हिंसा और हथियारों को बढ़ावा देने वाले गाने बजाए जाने पर हाईकोर्ट का बड़ा कदम
चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में हाल ही में मशहूर सिंगर मासूम शर्मा के शो के दौरान हथियारों और हिंसा को बढ़ावा देने वाले गाने बजाए जाने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए चंडीगढ़ के डीजीपी, डिप्टी कमिश्नर और पीयू के डीन स्टूडेंट वेलफेयर (DSW) को नोटिस जारी किया है और उनसे जवाब मांगा है कि हाईकोर्ट के पुराने आदेशों के बावजूद ऐसा आयोजन कैसे होने दिया गया।
2019 के हाईकोर्ट आदेशों की अनदेखी का आरोप
यह याचिका एडवोकेट यतीन मेहता द्वारा दाखिल की गई थी। उन्होंने याचिका में यह दलील दी कि 2019 में हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के डीजीपी को यह आदेश दिए थे कि किसी भी सार्वजनिक आयोजन में अश्लीलता, हिंसा और हथियारों को महिमामंडित करने वाले गानों पर सख्त पाबंदी लगाई जाए। इसके बावजूद, पीयू में हुए इस शो में ऐसे गाने बजाए गए, जो हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना थे।
युवाओं पर हिंसा के प्रभाव की चिंता
याचिकाकर्ता ने कहा कि इस तरह के गाने युवा पीढ़ी को गलत दिशा में ले जाते हैं और उनमें हिंसा की प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं। एक शैक्षणिक संस्थान में इस प्रकार की गतिविधियों की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए थी। उनका मानना था कि आयोजकों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
अधिकारियों को जवाब देने का निर्देश
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने के बाद संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई में अपना जवाब दाखिल करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई अधिकारी जवाब दाखिल करने में असफल रहता है, तो उसे अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होकर सफाई देनी होगी।
आगे की कार्रवाई
अब इस मामले की अगली सुनवाई पर अदालत में क्या कार्रवाई होती है, उस पर सबकी नज़रें टिकी हुई हैं। इस मामले का कानूनी और सामाजिक दोनों दृष्टिकोण से काफी महत्व है, क्योंकि यह शैक्षणिक संस्थानों में हिंसा और अश्लीलता को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता को उजागर करता है।