पाकिस्तानी कॉमेडियन इफ्तिखार ठाकुर पर भड़के राइटर राकेश धवन, बोले- “औकात में रहो ठाकुर”

पाकिस्तानी कॉमेडियन इफ्तिखार ठाकुर पर भड़के राइटर राकेश धवन, बोले- “औकात में रहो ठाकुर”

'चल मेरा पुत्त' जैसी मशहूर पंजाबी फिल्म लिख चुके राकेश धवन ने पाकिस्तानी कॉमेडियन इफ्तिखार ठाकुर की पंजाबी फिल्मों को लेकर की जा रही ऊलजलूल बयानबाजी का जवाब दिया। - Dainik Bhaskar

चंडीगढ़, 7 जून 2025 — पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री को लेकर विवादित बयान देने वाले पाकिस्तानी कॉमेडियन इफ्तिखार ठाकुर को अब उसी इंडस्ट्री से करारा जवाब मिला है। सुपरहिट पंजाबी फिल्मों के लेखक राकेश धवन ने सोशल मीडिया पर ठाकुर की “ऊलजलूल बयानबाजी” पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है, “औकात में रहो ठाकुर। तुमसे तो घर नहीं चलता, पंजाबी फिल्मों को क्या चलाओगे?”

राकेश धवन, जिन्होंने ‘चल मेरा पुत्त‘ फिल्म के तीनों पार्ट लिखे हैं, ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट के ज़रिए ठाकुर की बातों को सिरे से नकारा और उन्हें याद दिलाया कि कैसे भारतीय पंजाबी फिल्मों ने उन्हें पहचान दी।

क्या है विवाद?

पाकिस्तानी कॉमेडियन इफ्तिखार ठाकुर ने 5 जून को एक इंटरव्यू में कहा था कि “पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री पाकिस्तानी कलाकारों के दम पर चलती है। हम ही उनकी फिल्मों की कॉमेडी लिखते हैं, डायलॉग सुधारते हैं और हमारी वजह से फिल्में हिट होती हैं।”
ठाकुर का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद इंडस्ट्री में हलचल मच गई।

राकेश धवन का करारा जवाब

धवन ने अपनी पोस्ट में लिखा:
“तुम तो पाकिस्तान में वल्गर कॉमेडी और कुछ टीवी शोज तक सीमित थे। हमारी ‘चल मेरा पुत्त’ ने तुम्हें इस काबिल बनाया कि आज तुम टीवी इंटरव्यूज में बैठकर बकवास कर पा रहे हो।”

उन्होंने याद दिलाया कि ‘चल मेरा पुत्त’ के तीनों भागों में ठाकुर ने काम किया, और इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की। अमरिंदर गिल स्टारर इस सीरीज को दोनों देशों में खूब पसंद किया गया था।

सोशल मीडिया पर रिएक्शन

राकेश धवन की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर यूज़र्स भी दो गुटों में बंट गए हैं। कुछ लोग धवन का समर्थन कर रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग ठाकुर की प्रतिभा की तारीफ कर रहे हैं। लेकिन ज्यादातर यूज़र्स का मानना है कि किसी एक फिल्म में काम कर लेने से पूरी इंडस्ट्री का श्रेय लेना गलत है।

निष्कर्ष

पाकिस्तानी कलाकारों का भारतीय पंजाबी फिल्मों में योगदान नकारा नहीं जा सकता, लेकिन उनकी भूमिका को लेकर जब बढ़ा-चढ़ाकर दावे किए जाते हैं, तो जवाब भी उसी अंदाज में आता है। इस पूरे विवाद से एक बार फिर साबित होता है कि फिल्म इंडस्ट्री सिर्फ टैलेंट से नहीं, टीमवर्क और सम्मान से चलती है — चाहे वह पाकिस्तान हो या पंजाब।

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