बिहार के इस गांव में आजतक नहीं पहुंची बिजली, लालटेन और डिबरी के सहारे लोग कर रहे जीवन यापन

भोजपुर : बिहार के आरा में एक ऐसा गांव है जहां आज भी बिजली नही है या कह सकते है कि इस गांव में कभी बिजली आई ही नहीं. लेकिन यहां करोड़ों रुपए लगाकर गांव में बिजली पहुंचाने के लिए सोलर सिस्टम लगाया लेकिन सोलर सिस्टम लगने के एक साल बाद ही वह ठप हो गया और गांव वाले वापस अंधेरे में रहने को मजबूर हो गए. ये गांव कोइलवर नगर पंचायत के सुरौंधा टापू के नाम से जाना जाता है.

देश आजाद होने के बाद बिहार में कई सरकार आई और कई सरकारें चली गई,लेकिन सुरौंधा टापू पर बिजली पहुंचाने में कोई सफल नही है.फिलहाल केंद्र में ऊर्जा मंत्री भी आरा के सांसद आरके सिंह ही है उसके बावजूद भी सुरौंधा टापू पर बिजली की समस्या दूर नही हुई.

इस गांव में 120 घरों में एक हजार से ज्यादा लोग रहते हैं.समस्या कई प्रकार की है जैसे आज भी यहां सड़क नही है,बिजली नही है,पानी नही है,बच्चो के लिए स्कूल नही है.फिर भी यहां के लोग सन्तुष्ट है इसका कारण ये है कि यहां के लोगो को अब किसी से उम्मीद नही है.दुनिया को रोबोट चला रहा है या चंद्रमा पर मिशन मंगल सफल हो गया है इससे कोई फर्क इन्हें नही पड़ता यहां की खेती जिले में सबसे ज्यादा उपजाऊ है इसलिए यहां के लोग सब्जियों की खूब खेती करते है और नाव के सहारे कोइलवर आ कर बेचते है और वापस उसी टापू पर अंधेरे में चले जाते है.

इस गांव के रहने वाली महिला मीणा देवी बताती है कि एक इंसान या परिवार को जो जरूरत की चीजें इस देश मे सबको मिलती है उसमें से हमलोग को एक भी चीज नही मिलती.गांव के अब तक के इतिहास में सोलर लगने के बाद सिर्फ एक बार एक साल के लिए बिजली आई थी.पानी की समस्या है यहां सैकड़ो फिट खुदाई करने पर भी जमीन के अंदर से पानी नही आता एक दो घरों में चापाकल है उसी से पूरे गांव का काम चलता है.

सुरौधा टापू पर 5 वर्ष पहले बिजली के लिए सोलर प्लेट लगा था लगभग 150 घरों में एक-एक एलईडी लाइट और पंखा के लिए कनेक्शन दिया गया था. वहीं सौर ऊर्जा से जलापूर्ति लाइन बिछाकर कई घरों में पीने की पानी की व्यवस्था की गई थी लेकिन रखरखाव की अभाव और नियमित मेंटेनेंस नहीं होने के कारण 1 साल में ही सब कुछ खराब हो गया.अब लोग पानी और बिजली के लिए तरस रहे हैं. टापू की स्थिति ऐसी है कि स्कूल नहीं है जिससे बच्चे पटना जिला के बिहटा थाना क्षेत्र के पास के गांव लखन टोला में पढ़ने जाते हैं क्योंकि सुरौधा टापू से कोइलवर जाने के लिए सीधे सड़क नहीं है.

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