मनीमाजरा की जमीन बिक्री पर चंडीगढ़ नगर निगम में घमासान — विपक्ष ने लगाए ‘गुप्त सौदे’ के आरोप, पार्षदों का वॉकआउट

मनीमाजरा की जमीन बिक्री पर चंडीगढ़ नगर निगम में घमासान — विपक्ष ने लगाए ‘गुप्त सौदे’ के आरोप, पार्षदों का वॉकआउट

AAP प्रदेश अध्यक्ष विजय पाल सिंह। - Dainik Bhaskar

चंडीगढ़, रविवार: चंडीगढ़ नगर निगम की हाउस मीटिंग इस बार मनीमाजरा की जमीन की बिक्री को लेकर तीखी बहस और विरोध का केंद्र बन गई। विपक्षी दल आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के पार्षदों ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए कि वह यह फैसला जल्दबाजी और गुप्त तरीके से लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही को ताक पर रख रही है।

AAP अध्यक्ष ने उठाए बड़े सवाल

AAP के अध्यक्ष विजय पाल सिंह ने सवाल किया कि अगर मनीमाजरा की पूरी 19 एकड़ जमीन नगर निगम की है, तो उसमें से केवल 17.7 एकड़ जमीन ही क्यों बेची जा रही है?

“अगर पूरी जमीन बेची जाए, तो निगम को अधिक आमदनी होगी। यह मामला संदिग्ध है। लगता है किसी खास को फायदा पहुंचाने के लिए यह खेल खेला जा रहा है।”
उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्षदों की आपत्तियां पूरी तरह उचित हैं और इस पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए।

विपक्षी पार्षदों को सदन से निकाला गया, हुआ वॉकआउट

जब विपक्षी पार्षदों ने बैठक में इस मुद्दे पर सवाल उठाने शुरू किए, तो सदन अध्यक्ष द्वारा उन्हें सदन से बाहर निकाल दिया गया।
इसके विरोध में AAP और कांग्रेस दोनों दलों ने वॉकआउट कर दिया और मांग की कि:

  • हाउस मीटिंग दोबारा बुलाई जाए

  • जमीन बिक्री के फैसले पर खुली और पारदर्शी चर्चा हो

  • सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं

राजनीतिक माहौल गरमाया

विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सत्ता का दुरुपयोग कर रही है और ऐसे बड़े फैसले “बिना बहस के, चुपचाप” लिए जा रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा पार्षदों ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह निर्णय नगर निगम के हित में लिया जा रहा है और इससे राजस्व में वृद्धि होगी।

जनता में भी उठे सवाल

इस विवाद के बाद स्थानीय लोगों और रेजिडेंट वेलफेयर असोसिएशनों (RWAs) ने भी मांग की है कि जमीन बिक्री जैसे मामलों में जनता को विश्वास में लिया जाए और पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए।


पृष्ठभूमि:
मनीमाजरा, चंडीगढ़ का एक प्रमुख क्षेत्र है, जहां की 19 एकड़ जमीन निगम की संपत्ति है। जमीन का व्यापारिक उपयोग संभव होने के चलते इसकी काफी ऊंची बाजार कीमत है। ऐसे में इसके बिक्री को लेकर हो रही गतिविधियां सार्वजनिक हित, संभावित भ्रष्टाचार और पारदर्शिता के मुद्दों पर सवाल खड़े कर रही हैं।

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