मनीष सिसोदिया का पंजाब स्कूल दौरा: राजनीति में नया विवाद, विपक्ष ने किया विरोध

मनीष सिसोदिया का पंजाब स्कूल दौरा: राजनीति में नया विवाद, विपक्ष ने किया विरोध

आम आदमी पार्टी (AAP) के सीनियर नेता और दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के पंजाब के स्कूलों का दौरा करने से राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। विरोधी दलों ने इस पर कड़ा विरोध जताया है और सवाल उठाए हैं कि दिल्ली मॉडल अब सफल नहीं हो सकता और पंजाब में लागू करने की कोशिश गलत होगी। उनका कहना है कि अगर दिल्ली मॉडल को लागू करना ही है तो पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से इस्तीफा लेकर मनीष सिसोदिया को शिक्षा मंत्री बना देना चाहिए।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद मनीष सिसोदिया पंजाब दौरे पर आए थे। इस दौरान वे पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के साथ स्कूलों का दौरा कर रहे थे। उनका यह दौरा विरोध का कारण बना, खासकर डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट के नेताओं ने इस पर ऐतराज जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सिसोदिया और उनकी टीम स्कूलों का निरीक्षण कर रहे थे और प्रिंसिपल्स व अध्यापकों को दिशा-निर्देश दे रहे थे, जो कि उनके अनुसार गलत था। उनका आरोप था कि सिसोदिया दिल्ली में नकारे गए दिल्ली मॉडल को पंजाब में लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।

कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह वडिंग ने भी इस पर बयान दिया कि दिल्ली की जनता ने सिसोदिया को नकार दिया है और उन्हें पंजाब में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस को सलाह देने का हक है, लेकिन उनकी जगह पर स्कूलों का दौरा करना पंजाब के शिक्षा मंत्री की स्थिति को कमजोर करता है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर सिसोदिया को शिक्षा मंत्री बनाना है तो उन्हें हरजोत सिंह बैंस से इस्तीफा लेकर उन्हें मंत्री बनाना चाहिए, लेकिन ऐसा करने से पंजाब के लोग और गुस्से में आ सकते हैं।

दिल्ली और पंजाब के बीच 2022 में एक नॉलेज शेयरिंग प्रोजेक्ट के लिए एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) साइन किया गया था, जिसका उद्देश्य दोनों राज्यों की सरकारों को एक-दूसरे के प्रोजेक्ट्स से सीखने का अवसर प्रदान करना था। इस पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हस्ताक्षर किए थे। अब इस एमओयू के भविष्य को लेकर नई सरकार को फैसला लेना है।

इस पूरे विवाद ने पंजाब की राजनीति को गरमा दिया है और अब यह देखना होगा कि आगे चलकर इस मुद्दे पर कौन सा रुख अपनाया जाता है।

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