लुधियाना कोर्ट ने पुलिस की रिपोर्ट को खारिज किया, वकील के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश
लुधियाना में पुलिस को स्थानीय कोर्ट से बड़ी फटकार मिली है। कोर्ट ने पुलिस की रिपोर्ट को खारिज कर दिया, जिसमें चोरी के एक मामले में एक आरोपी वकील को ‘निर्दोष’ घोषित किया गया था। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया था कि 2022 में घोषित अपराधी वकील के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। यह मामला अलहमद नामक कोर्ट कर्मचारी के कमरे से कंप्यूटर स्क्रीन और केस फाइल चोरी से जुड़ा था।
कोर्ट का आदेश: लुधियाना कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस की घटिया जांच पर ध्यान नहीं दिया जा सकता है। एक मजिस्ट्रेट के पास यह अधिकार है कि वह पुलिस जांच की निगरानी करे और यह सुनिश्चित करे कि जांच निष्पक्ष, उचित और पारदर्शी तरीके से हो। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस को वकील हरदयाल इंदर सिंह ग्रेवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करनी चाहिए, क्योंकि अदालत ने उसे 14 जुलाई 2022 को भगोड़ा घोषित किया था।
एफआईआर की प्रक्रिया: पुलिस ने 27 फरवरी 2022 को चोरी की एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें बताया गया था कि कोर्ट परिसर से कंप्यूटर स्क्रीन और केस फाइल चोरी हो गई थी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी चेतन कुमार को गिरफ्तार किया, और उसने खुलासा किया कि चोरी के मामले में वकील का भी हाथ था। चेतन ने बताया कि वकील ने चोरी की फाइल को सैलून मालिक को भेज दिया था, जिसके बाद पुलिस ने वकील को मामले में नामजद कर लिया था।
वकील का पक्ष: वकील ने पुलिस द्वारा किए गए जांच कार्य को गलत बताते हुए पुलिस कमिश्नर से जांच की मांग की थी, और पुलिस ने 19 मई 2022 को रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें वकील को निर्दोष घोषित कर दिया था। हालांकि, अदालत ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया और पुलिस को निर्देश दिया कि वकील के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
कानूनी प्रक्रिया: वकील ने इस मामले में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय और बाद में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। हालांकि, कोर्ट के आदेशों के बाद अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
यह घटना पुलिस की जांच प्रक्रिया और कोर्ट के आदेशों का पालन न करने के गंभीर मुद्दे को उजागर करती है, जिससे पुलिस को अदालत के आदेशों को सही तरीके से लागू करने की चुनौती मिली है।