लुधियाना में पीएयू पार्किंग विवाद: आप सरकार ने लिया यू-टर्न, बड़ा एक्शन जल्द होने की संभावना

लुधियाना में पीएयू पार्किंग विवाद: आप सरकार ने लिया यू-टर्न, बड़ा एक्शन जल्द होने की संभावना

मंगलवार को पीएयू में धरने दौरान कर्मचारियों को हिरासत में लेती पुलिस। (फाइल शाट) - Dainik Bhaskar

लुधियाना, 24 अप्रैल 2025 — पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) में पार्किंग को लेकर हुए विवाद में पीएयू के कर्मचारी अमरीक सिंह को सस्पेंड किए जाने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। यह विवाद आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता परमवीर प्रिंस और पीएयू के कर्मचारी अमरीक सिंह के बीच हुआ था। विवाद के बाद मंगलवार को यूनियन ने परमवीर प्रिंस के खिलाफ धरना देने का ऐलान किया था, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने कई प्रोफेसरों और कर्मचारियों को डिटेन कर लिया।

आप सरकार का यू-टर्न और बड़ा एक्शन

सूत्रों के मुताबिक, आप सरकार अब इस मामले में यू-टर्न लेते हुए जल्द ही एक बड़ा एक्शन लेने की तैयारी कर रही है। खासतौर पर, पीएयू कर्मचारी अमरीक सिंह को बहाल करने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अमरीक सिंह की पत्नी का आज सुबह निधन हो गया है, जिससे यूनियन एक बार फिर कोई बड़ा ऐलान कर सकती है। इस पूरे घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए, आप नेता परमवीर प्रिंस के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी हो रही है।

परमवीर प्रिंस का बयान

इस मामले में दो दिन पहले परमवीर प्रिंस ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपने ऊपर लगे आरोपों को झूठा और बेबुनियादी बताया था। उन्होंने कहा था कि वह दो पुरुष दोस्तों के साथ पार्किंग में थे और किसी के साथ अभद्रता नहीं की। हालांकि, उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी से यह संकेत मिलते हैं कि पार्टी इस मामले में गंभीर कदम उठा सकती है।

पीएयू यूनियन और हलका पश्चमी के चुनावी समीकरण

पीएयू में कर्मचारियों की संख्या लगभग 1,000 परिवारों और 2,000 से अधिक कर्मियों की है, जिनका मतदान प्रभाव लगभग 5,000 वोट का है। इस बात को ध्यान में रखते हुए, हलका पश्चमी क्षेत्र में आगामी उपचुनाव के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण हो सकता है। 2022 में कांग्रेस के प्रत्याशी भारत भूषण आशु को भी पीएयू यूनियन से पंगा लेना महंगा पड़ा था, और अब आप सरकार भी उसी रास्ते पर चल रही है।

भारत भूषण आशु और पीएयू यूनियन विवाद

2022 के विधानसभा चुनाव में, भारत भूषण आशु को पीएयू यूनियन से तकरार का सामना करना पड़ा था। यूनियन के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग को लेकर आशु और यूनियन के बीच विवाद हुआ था। इस विवाद के बाद यूनियन ने उन्हें वोट न देने का ऐलान किया था, और उनका चुनावी प्रदर्शन प्रभावित हुआ था। अब, आप सरकार और परमवीर प्रिंस को भी ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, यदि वे इस विवाद को सुलझाने में असफल रहते हैं।

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