हल्द्वानी. उत्तराखंड में लकड़ी तस्करी इन दिनों चरम पर है. तस्करों ने जंगलों में खड़े हरे पेड़ काटकर ठिकाने लगाने के लिए उनके गिल्ट बना दिए गए थे. वन विभाग की टीम ने समय-समय पर कार्रवाई कर इन गिल्टों को जब्त कर अपने कार्यालय परिसर में जमा कर दिया गया. इस कार्रवाई में वन विभाग को जंगल काटने से नुकसान तो हुआ ही दूसरा नुकसान बरामद बेशकीमती लकड़ी के खुले में पड़े-पड़े साल-दर-साल सड़ने से हो रहा है.
राज्य के विभिन्न वन प्रभागों की हर रेंज में कार्रवाई के दौरान कहीं न कहीं तस्करों से लकड़ी बरामद की गई है. यह जब्त लकड़ी विभागीय कार्यालय परिसरों में खुले में रखी सड़ रही है. हल्द्वानी में तराई केंद्रीय वन प्रभाग के जज फार्म स्थित एसओजी कार्यालय परिसर तो खुले में रखी ऐसी ही जब्त की गई विभिन्न लकड़ियों से भरा पड़ा है. इन लकड़ियों को समय से नीलाम कर वन विभाग राजस्व में करोड़ों रुपये जमा करा सकता था. लेकिन इसे लेकर वन विभाग के अधिकारी इस प्रक्रिया में तमाम तकनीक दिक्कतें गिनाते हैं. साल-दर-साल रेंज कार्यालयों में बर्बाद हो रही करोड़ों रुपये कीमत की यह लकड़ी इस मानसून में और फिर भीगकर सड़ेगी, जिससे इसकी कीमत और कम हो जाएगी. लेकिन इसकी नीलामी प्रक्रिया में तमाम पेंच बताकर विभाग इस ओर से आंखें मूंदे हुए हैं.
कैसे होती है नीलामी?
तराई पूर्व वन प्रभाग हल्द्वानी हिमांशु बागरी ने बताया कि वन तस्करों से बरामद लकड़ी के मामलों को विभागीय स्तर पर निपटाकर उनकी वन निगम के माध्यम से नीलामी की जाती है. इसके अलावा जो मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं, उनमें कोर्ट से अनुमति लेकर लकड़ी को नीलाम किया जाता है. इस समय विभाग की पास करोड़ों की लकड़ियां जब्त है.
विभाग को दोहरा नुकसान
तस्करों से बेशकीमती खैर, सागौन और साल की लकड़ी बरामद की गई है. जिसे उन्होंने हल्द्वानी में तराई केंद्रीय वन प्रभाग के जज फार्म स्थित एसओजी कार्यालय परिसर में खुले में रखा है. यह लकड़ियां गर्मी, सर्दी व बारिश में हमेशा ऐसे ही खुले में रहती है. जिसे लकडृी खराब होने लगी है.
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FIRST PUBLISHED : June 27, 2024, 17:40 IST










