शिरोमणि अकाली दल को खरड़ से बड़ा झटका, सीनियर नेता रणजीत सिंह गिल ने पार्टी छोड़ी
चंडीगढ़, 18 जुलाई: शिरोमणि अकाली दल (SAD) को खरड़ क्षेत्र से बड़ा झटका लगा है। पार्टी के सीनियर नेता और रियल एस्टेट कारोबारी रणजीत सिंह गिल ने शुक्रवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया। गिल, जो कि हलका इंचार्ज की जिम्मेदारी संभाल रहे थे और दो बार खरड़ विधानसभा से चुनाव भी लड़ चुके हैं, ने इस फैसले के पीछे कुछ अहम कारण बताए। हालांकि, उन्हें अब तक विधानसभा चुनावों में सफलता नहीं मिल पाई थी।
गिल को सुखबीर बादल के करीबी माना जाता है, और उनका अकाली दल में महत्वपूर्ण स्थान था। उनके पार्टी छोड़ने के फैसले से शिरोमणि अकाली दल को एक बड़ा राजनीतिक नुकसान हुआ है, खासकर खरड़ क्षेत्र में। गिल ने इस निर्णय को लेकर पार्टी की अंदरूनी नीतियों और कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और कहा कि यह कदम उन्होंने स्थानीय वर्करों से सलाह लेने के बाद उठाया है।
रणजीत सिंह गिल ने इस्तीफे की 4 मुख्य वजहें बताईं:
1. अकाली दल में असंतोष और नये लोगों का प्रमोशन
गिल ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अकाली दल में कुछ ऐसे लोग शामिल हो गए हैं, जिनके फैसलों से उन लोगों में निराशा फैल गई है, जो पार्टी के पुराने और वफादार सदस्य रहे हैं। इसके साथ ही बाहरी लोगों को प्रमोट किया जा रहा है, जिनका अकाली दल की विचारधारा से कोई संबंध नहीं है। हमारे परिवार ने सालों तक अकाली दल के साथ काम किया है, और इस बदलाव ने हमारे कार्यकर्ताओं को निराश किया।”
2. स्थानीय कार्यकर्ताओं की भावनाओं को नजरअंदाज किया गया
गिल ने कहा कि उनका यह फैसला उनके हलके के कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए लिया गया। उन्होंने बताया कि रविवार को हुई बैठक में उनके कार्यकर्ताओं ने उनसे यह मांग की थी कि वह पार्टी प्रधान से यह बात कहें। गिल ने इसे पार्टी नेतृत्व तक पहुँचाया, लेकिन उनके प्रयासों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
3. धार्मिक मुद्दों पर निराशा
गिल ने कहा कि पहले अकाली दल की नीतियाँ बेअदबी और बरगाड़ी कांड जैसे मुद्दों से जुड़ी हुई थीं, और बाद में माफीनामा जारी किया गया। लेकिन जब अकाल तख्त साहिब के जत्थेदारों को हटाने का मामला सामने आया, तो इससे उनके हलके के कार्यकर्ताओं में गहरी निराशा फैल गई। गिल ने पार्टी नेतृत्व से इस फैसले को वापस लेने की अपील की थी, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया।
4. स्थानीय नेताओं की अनदेखी
गिल ने कहा, “जब पार्टी की कोर कमेटी और वर्किंग कमेटी का गठन हुआ, तो उसमें हमारे हलके के नेताओं को कोई जगह नहीं दी गई, जबकि बाहर से लोगों को पार्टी में लाकर जिम्मेदारियां सौंपी गईं।” इससे स्थानीय नेताओं को यह महसूस हुआ कि उन्हें पार्टी में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा।
राजनीतिक परिणाम
रणजीत सिंह गिल के पार्टी छोड़ने से अकाली दल के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर खरड़ क्षेत्र में। उनका इस्तीफा पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी और कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ती असंतोष का संकेत हो सकता है। इससे पहले भी अकाली दल को अपने पारंपरिक समर्थकों के बीच खामियाज़ा भुगतना पड़ा है।
गिल का यह कदम उस समय आया है जब पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं, और पार्टी को अपनी रणनीतियों और नेतृत्व को लेकर नए समीकरणों की आवश्यकता है।