सुप्रीम कोर्ट में बालवंत सिंह राजोआना की मौत की सजा की माफी की याचिका पर सुनवाई जारी, 29 साल से जेल में हैं राजोआना
सुप्रीम कोर्ट ने बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका पर सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है। राजोआना ने अपनी मौत की सजा को माफ करने के लिए अपील की है, जिसमें उन्होंने “असाधारण” और “अनुचित देरी” का हवाला दिया है। उनका कहना है कि भारत सरकार ने उनकी दया याचिका पर निर्णय लेने में बहुत लंबा समय लिया है, जबकि वह पिछले 29 वर्षों से जेल में बंद हैं।
राजोआना 1995 में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में शामिल थे। उनका दावा है कि उन्होंने और उनके साथी दिलावर सिंह ने बेअंत सिंह को बम से उड़ा दिया था। राजोआना को इस अपराध में मौत की सजा सुनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी सरकार से कहा था कि वह दया याचिका पर निर्णय दो सप्ताह के भीतर ले, अन्यथा अदालत अंतरिम राहत पर विचार करेगी।
इस मामले में, राजोआना के अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दया याचिका पर निर्णय में हुई देरी को “चौंकाने वाला” बताते हुए अंतरिम राहत की मांग की। उनका कहना था कि इस लंबी अवधि में राजोआना को छह महीने या तीन महीने के लिए रिहा कर दिया जाए, क्योंकि अब वह एक “समाप्त व्यक्ति” हैं और जेल में रहते हुए उनके मानवाधिकार का उल्लंघन हो रहा है। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राजोआना के लिए किसी भी अंतरिम राहत का विरोध किया है।
राजोआना की सजा और उनकी दया याचिका पर चल रही यह कानूनी लड़ाई भारतीय न्यायपालिका के सामने एक संवेदनशील मुद्दा है, जिसमें सजा की यथासंवेदनशीलता और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।