हरियाणा सरकार ने यौन उत्पीड़न मामले में की गई गंभीर कानूनी गलती मानी, पीड़िता की पहचान उजागर करने पर नोटिफिकेशन में संशोधन

हरियाणा सरकार ने यौन उत्पीड़न मामले में की गई गंभीर कानूनी गलती मानी, पीड़िता की पहचान उजागर करने पर नोटिफिकेशन में संशोधन

चंडीगढ़, 1 मई 2025: हरियाणा सरकार ने एचसीएस अधिकारी रीगन कुमार की बर्खास्तगी से जुड़े नोटिफिकेशन में की गई कानूनी चूक को सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इस आदेश में यौन उत्पीड़न की शिकार महिला कर्मचारी की पहचान उजागर कर दी गई थी, जो कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 का सीधा उल्लंघन है।

क्या था मामला?
22 अप्रैल 2025 को जारी और राज्य सरकार के गजट में प्रकाशित नोटिफिकेशन में पीड़िता का नाम 15 बार दर्ज किया गया था, जिससे उसकी व्यक्तिगत पहचान पूरी तरह सार्वजनिक हो गई। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि पीड़िता के मानसिक, सामाजिक और कानूनी अधिकारों का हनन भी माना जा रहा है।

क्या कहता है कानून?
POSH अधिनियम, 2013 की धारा 16 (Section 16 of the Sexual Harassment of Women at Workplace Act) के तहत:

किसी भी यौन उत्पीड़न पीड़िता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जानी चाहिए।

उसका नाम, पता, पद, विभाग, शिकायत की प्रकृति आदि कोई भी विवरण सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

यहां तक कि RTI कानून में भी यह जानकारी देने से प्रतिबंधित है।

यह प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के विजया नाथ v/s राज्य जैसे मामलों में भी दोहराया जा चुका है।

सरकार ने मानी गलती, जारी किया संशोधित आदेश
सरकार ने अब 30 अप्रैल को हरियाणा के राज्यपाल के नाम से नया आदेश जारी किया है, जिसमें पुराने आदेश को संशोधित करते हुए पीड़िता के नाम के बजाय अब सिर्फ “शिकायतकर्ता” शब्द का इस्तेमाल किया गया है। यह संशोधन भी गजट में प्रकाशित कर दिया गया है।

विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया
कानूनविदों और महिला अधिकार संगठनों ने सरकार की इस गलती को गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि यह घटना दर्शाती है कि संवेदनशील मामलों के दस्तावेजों को लेकर प्रशासनिक सतर्कता कितनी जरूरी है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस गलती पर जवाबदेही तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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