हिमाचल प्रदेश के मंडी में बादल फटने से तबाही, 3 की मौत, कई लापता
मंडी/शिमला, 1 जुलाई 2025: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में सोमवार देर रात आई प्राकृतिक आपदा ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। जिले के चार अलग-अलग स्थानों पर बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें अब तक 3 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। करसोग क्षेत्र में एक और गोहर में दो लोगों की मौत हुई है, जबकि 10 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार मंडी के कुट्टी बाइपास, पुराना बस अड्डा, थुनाग और गोहर में देर रात बादल फटा। इसके बाद से पूरे क्षेत्र में मूसलाधार बारिश जारी है। गोहर के स्यांज गांव में दो घर पानी में बह गए, जिसमें 9 लोग बह गए हैं। साथ ही धर्मपुर के स्याठी गांव में भूस्खलन की वजह से दो घर और पांच गौशालाएं पूरी तरह ढह गई हैं, जिसमें 26 पालतू जानवरों की मौत हो गई है।
प्राकृतिक आपदा का दायरा लगातार बढ़ रहा है। मंडी जिले के विभिन्न हिस्सों में 20 से अधिक घरों के फ्लैश फ्लड और भूस्खलन में बहने या क्षतिग्रस्त होने की खबर है। कुकलाह गांव में कई घर और प्रसिद्ध माता कश्मीरी मंदिर भी बह गया।
शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी, हाईवे पर यातायात प्रभावित भारी बारिश को देखते हुए मंडी, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों में स्कूल और कॉलेजों को बंद करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। मंडी की सुकेती खड्ड समेत कई नाले उफान पर हैं, जिससे और खतरे की आशंका जताई जा रही है।
वहीं चंडीगढ़-मनाली फोरलेन पर कुल्लू और मंडी के बीच दवाड़ा में भूस्खलन के कारण रात से ट्रैफिक पूरी तरह बंद है। हाईवे पर फंसे यात्रियों ने रात टनल के अंदर गुजारनी पड़ी। सोमवार को भी हाईवे पांच घंटे के लिए बंद रहा था।
मौसम विभाग का अलर्ट जारी मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने अगले तीन घंटों के लिए बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर, सोलन और ऊना जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। लोगों से अपील की गई है कि वे नदी-नालों के पास न जाएं और सतर्क रहें।
प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य में जुटा जिला प्रशासन, एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। डीसी मंडी ने कहा है कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत पहुंचाई जा रही है और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा।
यह आपदा राज्य के लिए एक और चेतावनी है कि पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न खतरों के लिए सतर्कता और पूर्व योजना बेहद जरूरी है।