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40 वर्षीय किसान मानसिंह यादव ने बताया कि जंगलों में होने वाली बारिश के पानी के साथ चट्टानों के बारीक कण भी बहकर खेतों तक आ जाते हैं. यही पानी नदी में जाकर मिलता है, जिससे खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ती है. इसके अलावा किसान गांव के पशुओं के गोबर से तैयार जैविक खाद का उपयोग खेती में करते हैं. इन कारणों से ही अच्छी पैदावार हो पाती है. कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक पानी में बहकर आए प्राकृतिक लवणों में नाइट्रोजन, मालीब्लेडिनम, क्लोरीन, आर्सेनिक, भारी धातु, कार्बनिक पदार्थ व क्लोराइड, आयरन जैसे तत्व मिट्टी को और पोषक बना देते हैं.










