10 में से 4 लोग मानसिक रोगी, भूलकर भी नजरअंदाज न करें ये लक्षण; डॉक्टर से जानें बचाव के उपाय

पलामू. आज के समय में मानसिक रोग के मरीज दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं. ये बेहद चिंता का विषय बन गया है. मानसिक रोग एक ऐसा रोग है, जिसका पता सामान्य तौर पर नहीं लगाया जा सकता है. अगर पेट में दर्द हो या सिर में दर्द तो डॉक्टर के पास हम तुरंत इलाज के लिए चले जाते हैं, मगर मानसिक रोग का पता हमें चल नहीं पाता. कोरोना के बाद से इनकी संख्या में इजाफा हुआ है. सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो लगभग 70 फीसदी मरीज मानसिक रोग से ग्रसित हैं.

डिप्रेशन के सबसे ज्यादा मरीज
मेदिनिराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि मानसिक रोग कई प्रकार के होते हैं. कुछ मरीज अनुवांशिक रूप से ग्रसित मरीज होते हैं, जो की पागलपन के शिकार होते हैं. कुछ मरीज तनाव और अवसाद के होते हैं.आज के समय में सबसे ज्यादा मरीज अवसाद के हैं. हर 10 में से 4 व्यक्ति किसी न किसी अवसाद से ग्रसित हैं. लेकिन उन्हें इसका पता नहीं चल पाता है.और वो इलाज के लिए जनरल फिजिशियन के पास चले जाते हैं. जहां उनका उचित इलाज नहीं हो पाता है. इससे अवसाद इतना हावी हो जाता है कि लोग आत्महत्या तक करने लगते हैं.

क्या हैं अवसाद के लक्षण?
उन्होंने आगे बताया कि जिस प्रकार लोगों को डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की समस्या होती है. ठीक उसी प्रकार मानसिक रोग भी होता है, मगर लोगों के मन में इस रोग के प्रति जागरूकता की कमी है, जो लोग मनोचिकित्सक के पास नहीं जाते हैं. अगर कोई मरीज अवसाद यानी डिप्रेशन का शिकार है तो वो लंबे समय तक उदास होगा. उसका मन 2 सप्ताह तक लगातार उदास होगा. किसी भी काम को करने में मन नहीं लगेगा. छोटे-छोटे काम करने में थकावट हो जाना. इसके अलावा अनिद्रा का होगा. भूख न लगना. भविष्य को लेकर लगातार चिंता में रहना अवसाद के लक्षण है.

तीव्र गति के अवसाद होने पर लोग करते हैं आत्महत्या
उन्होंने बताया कि अवसाद के तीव्र होने के कारण सबसे ज्यादा लोग आत्महत्या करते हैं. इन्हें अपने जीवन को खत्म करने के अलावा कुछ नहीं दिखता. ऐसे में उनका इलाज करना बेहद जरूरी होता है. ये दवाइयां भी दो चार महीने तक ही चलती हैं. ऐसे में लोगों को चाहिए कि अवसाद से ग्रसित मरीज को जल्द से जल्द किसी मनो चिकित्सक के पास इलाज हेतु ले जाएं. इसके अलावा, जो माइल्ड और मध्यम के अवसाद के मरीज हैं, उन्हें इलाज की उतनी ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती है. ऐसे मरीज कोकाउंसलिंग और योगाभ्यास से ठीक किया जा सकता है.

तनाव से भी ग्रसित मरीजों की बढ़ रही संख्या
उन्होंने कहा कि इन दिनों तनाव से ग्रसित मरीज की संख्या देश भर में बढ़ रही है. इसके लक्षण हैं हाथ कंपन होना, अनावश्यक डर लगना, सिर में अचानक जोर का दर्द होना, पीठ में लंबे समय तक दर्द रहना. ऐसे में मरीज को मनोचिकित्सक से जरूर मिलना चाहिए, ताकि इलाज समय पर हो सके. उन्होंने बताया कि 10% से 20% ही अनुवांशिकता से ग्रसित मानसिक रोग के मरीज आते हैं, जबकि 90% मरीज अवसाद और तनाव से ग्रसित होते हैं.

योगाभ्यास से कर सकते हैं तनाव को दूर
उन्होंने कहा कि जिन्हें भी इस तरह की समस्या आ रही है. सबसे पहले वो मनोचिकित्सक से मिलें. इसके साथ साथ हेल्दी फूड खाएं, लाइफ स्टाइल को सुधाकर इस बीमारी से बच सकते हैं. समय-समय पर योगाभ्यास करना, मेडिटेशन करना, फल और सब्जियों का ज्यादा सेवन करना. ये मानसिक स्वास्थ्य को नियंत्रण करने में मददगार साबित होता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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