देहरादून: उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों की मदद के लिए उत्तराखंड पशु सखी योजना के तहत पशु सखियां बनाई जाएंगी. इसमें ग्रामीण इलाकों में 10वीं पास महिलाएं इसके लिए आवेदन कर सकती हैं. ऐसी महिलाओं को विभाग पशुओं के प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग देगा. वहीं, यह पशुपालकों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी, पशुधन बीमा आदि के लिये भी पशु सखी मददगार होंगी.
देहरादून के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी विद्यासागर कापड़ी ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए कहा कि हमारे ग्रामीण और सुदूरवर्ती क्षेत्र जहां पशुपालकों को कई तरह की मदद की जरूरत होती है. या ऐसे क्षेत्रों में जो पढ़ी-लिखी महिलाएं हैं और जो पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ विभाग की योजनाओं को उन तक पहुंचने का काम कर सकें. वे महिलाएं पशु सखी मिशन के तहत काम कर सकती हैं. जो 10वीं पास हो और उनकी आयु 30 वर्ष से ज्यादा हो.
देहरादून की अगर बात की जाए तो कलसी, विकास नगर, सहसपुर और चकराता ब्लॉक में अब तक कुल 25 पशु सखियों को 7 बैच में प्रशिक्षित किया जा चुका है. विभाग की कई योजनाएं जैसे पशुधन बीमा योजना, पशु टीकाकरण योजनाएं, ऋण की योजना आमजन मानस के बीच प्रचार प्रसार करना ही पशु सखी का काम होगा. इस मिशन का यही उद्देश्य है कि किस तरह से पशुपालन विभाग को आम जन मानस तक जोड़ा जाए. इन क्षेत्रों तक पशु चिकित्सक नहीं पहुंच सकते हैं. जहां, पशुओं के बीमार होने पर उनकी प्राथमिक चिकित्सा के लिए भी पशु सखी काम करेंगी. उन्हें विभाग की ओर से फर्स्ट एड किट दी जाएगी.
राज्य सरकार की ओर से पशु सखी को मिलेगा मानदेय
डॉ विद्यासागर कापड़ी बताते हैं कि पशु सखियों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार मानदेय भी देगी. अगर कोई पशु सखी किसी एक पशु का बीमा करवाती है, तो उसे 50 रुपये प्रति पशु के हिसाब से दिया जाएगा. इस तरह क़ई प्रकार से उन्हें भी रोजगार देने की कोशिश की जाएगी. जो भी महिला इस मिशन से जुड़ना चाहती है, वह महिला अपने ग्राम सभा या विभाग से जुड़े पशु चिकित्सालय में आवेदन पत्र और जरूरी कागज जमा कर सकती है. इस प्रक्रिया के बाद महिलाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी.
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FIRST PUBLISHED : May 1, 2024, 13:00 IST










