सालों पहले कैसे था बद्रीनाथ धाम का पैदल मार्ग? अब तो बदल चुकी है पूरी काया

ऋषिकेश: उत्तराखंड में स्थित योग नगरी ऋषिकेश एक पावन तीर्थ स्थल है. इसे तीर्थ यात्रा का मुख्य द्वार भी कहा जाता है. यहां स्थापित मंदिर व घाट मुख्य आकर्षण का केंद्र है. सालों पहले लोग यहां के मंदिर के दर्शन के बाद ही चार धाम की यात्रा किया करते थे. वहीं, हर साल हजारों की संख्या में लोग यहां मंदिरों के दर्शन करने आते हैं. यहां कई सारे प्राचीन व मान्यता प्राप्त मंदिर स्थापित हैं. यहां स्थापित हर मंदिर का अपना इतिहास, महत्व व विशेषता है. जैसा कि सभी जानते हैं कि ऋषिकेश चार धाम यात्रा का मुख्य द्वार है. वहीं, सालों पहले ऋषिकेश में स्थित त्रिवेणी घाट के पास वाला बाजार बद्रीनाथ धाम का पैदल मार्ग हुआ करता था.

कभी मशहूर था ये बाजार
लोकल 18 के साथ खास बातचीत में उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित सोमेश्वर महादेव मंदिर के महंत रामेश्वर गिरी ने बताया कि ऋषिकेश एक पावन तीर्थ स्थल है. यहां का इतिहास काफी रोचक है. यहां स्थापित त्रिवेणी संगम तीन पवित्र नदियों का संगम है. यहां स्थापित बाजार ऋषिकेश के मुख्य बाजार है, जहां से घूमने आए पर्यटक निशानी के रूप में इस बाजार से कुछ न कुछ खरीद कर ले जाते हैं. ये बाजार सालों पहले बद्रीनाथ जाने का पैदल मार्ग हुआ करता था. जब मोटर मार्ग की सुविधा उपलब्ध नहीं थी, तब लोग इस रास्ते से पैदल चलकर बद्रीनाथ जाते थे. वहीं, अब इसी रास्ते पर कई सारी दुकानें, रेस्टोरेंट व इमारत बन गई हैं.

ऋषिकेश के मेन बाजार का इतिहास
रामेश्वर गिरी ने बताया कि सालों पहले ऋषिकेश एक जंगल के समान था. यहां गिने चुने कुछ ही मंदिर जैसे की भरत मंदिर, सोमेश्वर, वीरभद्र और चंद्रेश्वर ही स्थापित थे. तब ऋषि मुनि यहां घोर तप किया करते थे. उस समय मोटर मार्ग की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी. इस कारण से लोग पैदल ही चार धाम की यात्रा पूरी किया करते थे. उस समय ऋषिकेश का मेन बाजार तीर्थ यात्रियों के लिए बद्रीनाथ धाम जाने का पैदल मार्ग हुआ करता था. सभी तीर्थ यात्री त्रिवेणी में स्नान के बाद यहीं से अपनी तीर्थ यात्रा प्रारंभ करते थे.

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FIRST PUBLISHED : May 1, 2024, 12:36 IST

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