हिमांशु जोशी/ पिथौरागढ़: उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट घोषित होने के बाद सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था भी सामने आई है. पिथौरागढ़ जिले की बात करें तो यहां ऐसे कई सरकारी स्कूल हैं, जहां शिक्षक ही मौजूद नहीं हैं. कुछ चंद स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो अन्य सभी स्कूल बिना प्रधानाचार्य के चल रहे हैं. तो वहीं, सिर्फ एक टीचर के सहारे चलने वाले स्कूलों की संख्या भी काफी ज्यादा है.
439 स्कूलों में मात्र एक टीचर
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पिथौरागढ़ जिले में 68 इंटरमीडिएट कॉलेज हैं. इनमें से लड़कियों के लिए 7 हैं. इसके अलावा जिले में 50 हाई स्कूल हैं, जिनमें से 5 लड़कियों के हैं. प्राथमिक शिक्षा की बात करें तो जिले में करीब 1031 सरकारी स्कूल हैं. जिले में कुल 439 ऐसे सरकारी स्कूल हैं, जहां सिर्फ एक टीचर तैनात है.
सिर्फ 10 प्रधानाचार्य
वहीं, 215 प्रधानाचार्य के पद स्वीकृत हैं, मात्र 10 ही कार्यरत हैं. प्रवक्ता संवर्ग की बात की जाए तो 1058 में से सिर्फ 470 ही हैं. इनमें भी 316 गेस्ट टीचर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. सहायक टीचर की बात करें तो यहां भी 389 पद खाली चल रहे हैं. यहां भी विभाग 89 गेस्ट टीचर्स से व्यवस्था बनाए हुए है.
बिना शिक्षक के 37 स्कूल
प्राथमिक विद्यालयों में तो हाल और बुरे हैं. जिले में 439 स्कूल में सिर्फ एक टीचर है, तो 37 स्कूल बिना शिक्षक के चल रहे हैं. शिक्षकों की इतनी भारी कमी पर व्यवस्था को बनाए रखने पर जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार जुकरिया से सवाल किया गया, तो उन्होंने बताया कि शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए रोटेशन व्यवस्था बनाई हुई है. जिन स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, वहां दूसरे स्कूलों के शिक्षक आकर व्यवस्था को संभालते हैं.
बंद होने की कगार पर सरकारी स्कूल
अब ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता कि पहाड़ों में सभी को सस्ती शिक्षा देने के मकसद से खोले गए स्कूलों में क्यों छात्रों की संख्या कम होती जा रही है. इस वजह से स्कूलों को बंद करने का फैसला भी लिया जा रहा है. सीमांत जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जो बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट जारी होने के बाद सबके सामने आई है. जिले में इस बार 34 छात्र छात्राओं ने वरीयता सूची में स्थान पाया है.
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FIRST PUBLISHED : May 2, 2024, 11:16 IST










