ज्यादा गुस्सा करने से कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है.शोधकर्ताओं का कहना है कि गुस्सा करने से ब्लड वेसल्स इंपेयर होती हैं.
Anger increase CVDs Risk: आजकल लोगों की जिंदगी काफी अस्त-व्यस्त हो गई है, जिसकी वजह से गुस्सा बढ़ रहा है. तमाम लोग फ्रस्ट्रेशन के कारण घर से लेकर ऑफिस तक छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लगते हैं. अब तक आपने सुना होगा कि हद से ज्यादा गुस्सा करने से मेंटल हेल्थ खराब हो सकती है, लेकिन एक नई रिसर्च में बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है. इसमें पता चला है कि ज्यादा गुस्सा आपकी ब्लड वेसल्स के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. इसकी वजह से लोगों को हार्ट अटैक व स्ट्रोक जैसी जानलेवा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार किसी तनावपूर्ण अनुभव के बाद गुस्सा करने से आपकी रक्त वाहिकाओं यानी ब्लड वेसल्स की आराम करने की क्षमता अस्थायी रूप से बिगड़ सकती है. ब्लड वेसल्स के जरिए भी शरीर में सही ब्लड फ्लो होता है. जब इन वेसल्स में परेशानी हो जाती है, तब ब्लड फ्लो बाधित होने लगता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक की कंडीशन पैदा हो सकती है. शोधकर्ताओं ने इस स्टडी में शामिल लोगों की रक्त वाहिकाओं की परत वाली कोशिकाओं का मूल्यांकन गुस्से से पहले और इसके बाद किया. इसी डाटा के आधार पर शोधकर्ताओं ने अध्ययन का निष्कर्ष निकाला है.
शोधकर्ताओं ने स्टडी में पाया कि एक गुस्सा करने वाली घटना को याद करने से रक्त वाहिका का फैलाव 40 मिनट तक बिगड़ जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. अमेरिका के वाशिंगटन स्थित कोलंबिया यूनिवर्सिटी के इरविंग मेडिकल सेंटर में मेडिसिन के प्रोफेसर और स्टडी के लीड ऑथर डॉ. दाइची शिम्बो का कहना है कि हमने देखा कि गुस्से की स्थिति पैदा करने से रक्त वाहिका में शिथिलता आ गई, हालांकि हम अभी तक नहीं समझ पाए हैं कि इन परिवर्तनों का कारण क्या हो सकता है. अध्ययन से पता चला है कि मेंटल हेल्थ किसी व्यक्ति के हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम कारकों को प्रभावित कर सकती है.
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के अनुसार अमेरिका में हर 40 सेकंड में किसी को हार्ट अटैक आता है और हार्ट डिजीज से हर 33 सेकंड में एक अमेरिकी की मौत हो जाती है. AHA की यह भी रिपोर्ट है कि अमेरिका में हर 40 सेकंड में किसी एक शख्स को स्ट्रोक होता है और हर 3 मिनट 14 सेकंड में एक अमेरिकी की इससे मृत्यु हो जाती है. दुनियाभर में हर साल करोड़ों की तादाद में लोग कार्डियोवैस्कुलर डिजीज की चपेट में आकर अपनी जान गंवा देते हैं. हार्ट डिजीज के भारत में भी लाखों मरीज हैं. इससे बचने के लिए लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए और समय-समय पर कार्डियोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए.
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FIRST PUBLISHED : May 3, 2024, 14:20 IST










