रामकुमार नायक, रायपुर:- छत्तीसगढ़ में इन दिनों दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट के लिए काउंटडाउन शुरू हो गया है. जैसा कि माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर के सचिव पुष्पा साहू ने बताया था कि मई माह के पहले सप्ताह में रिजल्ट घोषित कर दिए जाएंगे. उसके बाद से सिर्फ बच्चों की ही नहीं, बल्कि माता-पिता और अभिभावकों की धड़कनें तेज हो गई हैं. कई माता-पिता ऐसे हैं, जो बच्चों के रिजल्ट को लेकर बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. वैसे तो हर माता-पिता को अपने बच्चे के बेहतर रिजल्ट को लेकर काफी उम्मीदें रहती हैं. अगर रिजल्ट उनके अनुरूप न आए, तो वे बच्चों के साथ मारपीट भी कर लेते हैं. बच्चों के रिजल्ट में ज्यादा उम्मीद करना कितना सही है, हम आपको बताने वाले हैं.
रूल एंड रेगुलेशन सिखाना जरूरी
मनोरोग विशेषज्ञ सुरभि दुबे ने लोकल18 को बताया कि हर माता-पिता को अपने बच्चों के रिजल्ट से बेहद उम्मीदें रहती हैं. लेकिन परीक्षा परिणाम उनके अनुरूप न आने पर मारपीट करना बहुत गलत है. माता-पिता द्वारा बच्चों को रूल एंड रेगुलेशन सिखाना बहुत जरूरी है. बच्चों के सामने उन्हें स्ट्रीक रहते हुए रूल एंड रेगुलेशन क्यों जरूरी है, यह बताना चाहिए. माता-पिता को बच्चों से ज्यादा अपेक्षा नहीं करनी चाहिए. जितनी बौद्धिक क्षमता बच्चे में है, वह उतना ही आगे बढ़ेगा. कई बार देखा जाता है कि माता-पिता बच्चों के रिजल्ट को सोशल गैदरिंग में मेडल्स के जैसे इस्तेमाल किया जाता है. हमें अपने बच्चों को हर फील्ड में बढ़ावा देना चाहिए, लेकिन क्या इसे आंकने के लिए बच्चे की क्षमता है.
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बच्चों के लिए बनाना चाहिए शेड्यूल
अगर माता-पिता को लगता है कि आपका बच्चा कोई चीज को एंजॉय नहीं कर रहा है, तो हमें उसे थोपना नहीं चाहिए. साथ ही बच्चों की पढ़ाई का शेड्यूल बना लेना चाहिए. अगर आप साथ बैठे हैं, तो आप भी कोई किताब लेकर कुछ पढ़ सकते हैं. इससे बच्चे का भी मन पढ़ाई में लगेगा. पढ़ाई और परीक्षा परिणाम को एन्जॉयमेंट के रूप में, न कि तनाव के रूप में लेना चाहिए. बच्चों को मेहनत करना सीखाना चाहिए. मापदंड नंबर नहीं, मापदंड यह है कि बच्चा मेहनती बने.
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FIRST PUBLISHED : May 3, 2024, 18:23 IST










