;बाड़मेर. दरगाह में चादर तो चढ़ाई जाती है, लेकिन झाड़ू के बारे में पहली बार पता चला. ऐसा राजस्थान के बाड़मेर में ढेर बाबा की दरगाह में होता है. सुनकर हैरानी होती है, लेकिन मान्यता ही कुछ ऐसी है. लोगों का कहना है कि यहां झाड़ू चढ़ा देने से ही सारे दुख-दर्द दूर हो जाते हैं.
बाड़मेर की झाड़ू वाली दरगाह
बाड़मेर में ढेर बाबा जी की दरगाह लोगों के लिए एक अजूबा है. लोग सालों से यहां चढ़ावे में झाड़ू चढ़ा रहे हैं. हां, सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाली झाड़ू. सुनने में अजीब लगता है, लेकिन इसके पीछे दिलचस्प वजह है. दरगाह तब की है, जब बाड़मेर खाली हुआ करता था. एक आलीम थे जिन्होंने कहा था कि उनके पास पड़ा कचरे का ढेर साफ किया जाए.
लोगों ने कचरा हटाने के लिए झाड़ू दी. आसपास के लोग यहां झाड़ू देने के लिए आने लगे. हर कोई आता था और पूछता था कि कचरे के ढेर वाली दरगाह कहां है. तभी इस दरगाह को ढेर वाली दरगाह कहा जाता है.
आखिर झाड़ू ही क्यों चढ़ाई जाती है झाड़ू?
इस दरगाह में झाड़ू चढ़ाने के पीछे दिलचस्प वजह है. लोगों का कहना है कि झाड़ू घर की तरह रोगों की भी सफाई कर देती है. त्वचा से जुड़ी जो भी परेशानी हो उसको झाड़ू चढ़ाकर खुद से दूर करने की मान्यता है. यही कारण है कि दरगाह के पास झाड़ू का पहाड़ लगा रहता है. मन्नत पूरी होने पर झाड़ू चढ़ाना शुभ माना जाता है.
इस वजह से भी है खास
दरगाह का नाम सुन अगर आपको ऐसा लग रहा है कि यहां सिर्फ मुस्लिम जाति के लोग ही जाते हैं, तो आप गलत हैं. हर धर्म के लोग इस दरगाह में जाते हैं. खासतौर पर गुरुवार के दिन इस दरगाह में भारी भीड़ लगती है.
ये हैं भारत की कुछ और अनोखी दरगाह
पूरे देश में कई सारी प्रसिद्ध दरगाह हैं. हर दरगाह की एक अलग कहानी है. फतेहपुर सीकरी की सलीम चिश्ती की दरगाह, दिल्ली की हजरत निजामुद्दीन दरगाह, अजमेर शरीफ की ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह, मुंबई का हाजी अली दरगाह और हरिद्वार की पिरान कलियर शरीफ की दरगाह भी बहुत प्रसिद्ध है.
कैसे पहुंचे ढेर बाबाजी की दरगाह
दरगाह पहुंचने के लिए बाड़मेर रेलवे स्टेशन से ऑटो रिक्शा या किसी भी लोकल साधन से आसानी से पहुंचा जा सकता है. यह बाड़मेर रेलवे स्टेशन से 2 किलोमीटर दूर है. दरगाह तक जाने के लिए आप लोकल लोगों से हिंगलाज शक्तिपीठ माता मंदिर का रास्ता भी पूछ सकते हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 25, 2024, 08:48 IST










