MP News: 9 साल में खर्च हुए 1200 करोड़ रुपये, काट दिए 3 हजार पेड़, क्या पटरी से उतरा स्मार्ट सिटी मिशन?

भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकार का ड्रीम प्लान स्मार्ट सिटी मिशन पूरी तरह से पटरी से उतरता नजर आ रहा है. 9 साल में इस मिशन के तहत प्रस्तावित एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ है. यह स्थिति तब है, जब सरकार अभी तक इस पर 1200 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है. इस मिशन के तहत भोपाल के टीटी नगर में प्रशासन ने 2 हजार परिवारों को ख्वाब दिखाकर 342 एकड़ खाली कराई. तीन हजार पेड़ काटे. लेकिन, जनता को इसका कोई फायदा नहीं मिला. अब हालात यह हैं कि यह पूरा इलाका उजड़ा हुआ है और लोगों ने यहां झुग्गियां बनाना शुरू कर दिया है.

गौरतलब है कि, जिला प्रशासन 11 कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर 55 करोड़ रुपये, एमपी नगर की मल्टी लेवल पार्किंग पर 50 करोड़ रुपये, टीटी नगर की मल्टी लेवल पार्किंग पर 36 करोड़ रुपये, महालक्ष्मी परिसर, बीडीए के 551 फ्लैट पर 180 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है. इसके अलावा आर्च ब्रिज पर 39 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. बता दें, प्रशासन को तीन फेज में 3 हजार सरकारी मकान बनाने थे. लेकिनि, पहले फेज में छठवां टावर विवादों में फंस गया. उसे बनाया नहीं जा सका. जबकि, जो पांच टावर बने हैं उनमें मूलभूत सुविधाएं ही नहीं हैं.

कहीं कुछ भी स्मार्ट नहीं
भोपाल से प्रकाशित हिंदी अखबार दैनिक भास्कर के मुताबिक, प्रशासन को टीटी नगर में स्मार्ट दशहरा मैदान बनाना था. इस पर 31 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे. लेकिन, यह प्रोजेक्ट अभी अधूरा है. इसी तरह जवाहर चौक से लेकर माता मंदिर तक बनाई जाने वाली बुलेवर्ड स्ट्रीट का एक हिस्सा अधूरा है. इस पर 40 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. टीटी नगर के हाट बाजार में दुकानें लग गई हैं. लेकिन, यहां पानी और सीवेज जैसी सुविधाएं भी लोगों को नहीं मिल रहीं. शहर के डिपो चौराहे से पॉलिटेक्नीक तक स्मार्ट रोड बनना था. लेकिन, कमाल की बात यह है कि यहां पार्किंग भी नहीं मिल रही.

काट दिए करोड़ों के तीन हजार पेड़
प्रशासन ने इस प्रोजेक्ट में तीन हजार पेड़ काट दिए. अगर सुप्रीम कोर्ट से इन पेड़ों की कीमत लगाई जाए तो कुल 2160 करोड़ रुपये के पेड़ काट दिए गए हैं. इसे लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की योजना तो गजब की थी. लेकिन उसकी प्लानिंग ने सब बिगाड़ दिया. सरकारी अधिकारियों ने विदेशी शहरों को देखा और बिना सोचे-समझे उस योजना को यहां लागू कर दिया. जबकि, हर शहर की जरूरत अलग होती है. अधिकारियों ने जनता से राय-मशवरा ही नहीं किया. उसके बाद इसमें नगर निगम के प्रोजेक्ट जुड़ गए. उसने और गड़बड़ कर दी.

Tags: Bhopal news, Mp news

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