अनुज गौतम/सागर. बुंदेलखंड के सागर में यूं तो कई प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मंदिर हैं.लेकिन, सिविल लाइन मकरोनिया रोड पर स्थित हनुमान जी का कठवा पुल सरकार के नाम से प्रसिद्ध मंदिर है. इस मंदिर में मां अंजनी के लाल पवन पुत्र विराजमान है. ऐसी मान्यता है कि मंदिर आकर केवल दर्शन मात्र और सच्ची श्रद्धा रखने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. यहां पर सेना के अधिकारी और जवान भी भगवान के दर्शन करने आते हैं. यह मंदिर करीब डेढ़ सौ साल पुराना बताया जाता है. इस क्षेत्र की सिद्धि इतनी है कि अधिकारियों से लेकर विधायक मंत्री तक यहां पर प्रार्थना करने आते हैं.
मंदिर के पुजारी पंडित उमाकांत गौतम ने लोकल 18 से कहा कि ब्रिटिश काल में यहां पर कठुआ (लकड़ी ) का पुल हुआ करता था. सेना की रेंज के अंदर एक डेम है. जिससे पानी का रिसाव होता था. यहां से बहता था. पानी निकासी अच्छे से हो इसके लिए खुदाई करवाई जा रही थी. बरगद के पेड़ के नीचे हनुमान जी की प्रतिक्रिया मिली. इसके बाद पुल के ही पास इस मूर्ति की स्थापना की गई थी. तब वृंदावन पुजारी ने यहां पर पूजा शुरू की थी. उसके बाद उनके शिष्य सूरज उपाध्याय मंदिर में रहे. उनके निधन के बाद में भगवान के चरणों में लगा हुआ हूं.
दिनभर लगता है भक्तों का तांता
यहां पर अगरबत्ती नारियल जैसी चीजों से अर्जी नहीं लगती है. केवल सच्चे मन से भाव से आने पर श्रद्धापूर्वक दर्शन कर प्रार्थना करें. सरकार अपने श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करते हैं. यहां आषाढ़ के मंगलवार को विशेष पूजन अर्चन किया जाएगा. सुबह हनुमान जी महाराज का विशेष श्रृंगार दोपहर में भंडारा होगा. वहीं, शाम को महाआरती का आयोजन किया जाएगा. यहां दिनभर भक्तों का तांता लगा रहेगा.
दर्शन करने से होती है मनोकामनाएं पूर्ण
आषाढ़ की मंगलवार पर हनुमान जी की पूजा करने से वह जल्दी प्रसन्न होते हैं. हनुमान जी को आषाढ़ के मंगल को ही भगवान राम के साक्षात दर्शन हुए थे. मिलन हुआ था इसलिए इसे बड़ा मंगल के रूप में भी जाना जाता है. इस दिन जो भी भक्त हनुमान जी महाराज की पूजा अर्चना करता है. दर्शन करने से उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 25, 2024, 20:12 IST










