Bhojshala ASI Survey: परमार काल से जुड़ी हैं मूर्तियां-अवशेष, क्या है इस पक्ष का दावा, HC में कब सब्मिट होगी रिपोर्ट?

धार. मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला का इंदौर हाईकोर्ट के आदेश के बाद से लगातार सर्वे जारी है. एएसआई (Archeological Survey of India) की टीम ने 26 जून को यहां 97वें दिन का सर्वे शुरू किया. एएसआई की टीम मजदूरों के साथ सुबह भोजशाला परिसर पहुंच गई थी. टीम यहां भोजशाला और इसके आसपास के 50 मीटर के दायरे में सर्वे कर रही है. उनके साथ हिंदू और मुस्लिम पक्षकार भी मौजूद हैं. सर्वे के तहत यहां फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है. इसके मद्देनजर प्रशासन ने यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. एएसआई को इस सर्वे की रिपोर्ट 2 जुलाई को हाईकोर्ट में दाखिल करनी है. इस मामले पर 4 जुलाई को सुनवाई होगी.

इस सर्वे के बीच हिंदू पक्षकार आशीष गोयल ने दावा किया है कि यहां से अभी तक जो नक्काशीदार पत्थर, मूर्तियां, सनातनी धर्म से जुड़े अवशेष मिले हैं, वो परमार कालीन हैं. चूंकि, राजा भोज परमार वंश के थे, उन्होंने ही भोजशाला का निर्माण करवाया था, इसलिए यहां परमार काल से जुड़े अवशेष मिल रहे हैं. बता दें, इस भोजशाला से अभी तक 1600 से ज्यादा अवशेष मिल चुके हैं. इनमें भगवान श्री कृष्ण-श्री विष्णु की परिवार सहित मूर्तियां, उर्दू-फारसी लिखे शिलालेख, गौशाला के नीचे से दीवारें, भाले, दीवार पर बाहर की तरफ बना गौमुख, शिखर का आधार, शंख चक्र, कमलपुष्प, स्तंभ, स्तंभों के अवशेष, स्तंभ के आधार, मां वाग्देवी की प्रतिमा, महिषासुरमर्दिनी प्रतिमा के अवशेष, तीर के छोटे-छोटे टुकड़े, धातु के सिक्के, गणेश प्रतिमा, भैरव नाथ, नीलम का पत्थर, भगवान बुद्ध की प्रतिमाओं के अवशेष, कई तरह के पत्थर शामिल हैं.

4 जुलाई को हाईकोर्ट में पेश होगी रिपोर्ट
गौरलतब है कि इस साल 11 मार्च को इंदौर हाईकोर्ट ने कहा था कि ज्ञानवापी के बाद अब मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला का एएसआई (ASI-Archaeological Survey of India) सर्वे होगा. इस मामले में सामाजिक संगठन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ के याचिका दाखिल की थी. हाई कोर्ट ने इसके लिए एएसआई को 5 सदस्यीय कमिटी गठन करने के आदेश दिए थे. इसके बाद भोजशाला में एएसआई का सर्वे 22 मार्च को शुरू हुआ. इसके बाद एएसआई ने भोजशाला के सर्वे के लिए इंदौर हाईकोर्ट से 8 हफ्तों का और समय मांगा था. हाईकोर्ट ने 29 अप्रैल को इस याचिका को मंजूर कर लिया है. अब एएसआई 4 जुलाई तक अपनी फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगी. दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष ने भी भोजशाला का सर्वे रोकने के लिए याचिका लगाई थी. उसकी याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था.

कोर्ट में किसने दाखिल की थी याचिका
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने करीब 1,000 साल पुराने भोजशाला परिसर की वैज्ञानिक जांच अथवा सर्वेक्षण अथवा खुदाई अथवा ‘ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार’ (जीपीआर) सर्वेक्षण समयबद्ध तरीके से करने की मांग की थी. बता दें, हिंदू संगठनों ने हाईकोर्ट में कहा था कि भोजशाला में मां सरस्वती का मंदिर है. अपने इस दावे को मजबूत करने के लिए हिंदू पक्ष ने हाईकोर्ट के सामने परिसर की रंगीन तस्वीरें भी पेश की थीं. भोजशाला केंद्र सरकार के अधीन एएसआई का संरक्षित स्मारक है. एएसआई के सात अप्रैल 2003 के आदेश के अनुसार चली आ रही व्यवस्था के मुताबिक हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुस्लिमों को हर शुक्रवार इस जगह नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है. मुस्लिम समुदाय भोजशाला परिसर को कमाल मौला की मस्जिद बताता है.

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