विश्व शुक्ला
रायपुर. एक समय में जेंडर चेंज करने की इच्छा जाहिर करना भी पाप माना जाता था. समाज के लिए ये विषय वर्जित या प्रतिबंधित था. इसके बारे में बात भी नहीं की जा सकती थी. पर अब समय बदलने के साथ समाज में जेंडर चेंज करने वालों की स्वीकार्यता बढ़ी है. यही कारण है कि इस समय छत्तीसगढ़ में हर महीने औसतन 3 से 4 जेंडर चेंज करने की सर्जरी हो रही है. इसके स्पेश्लिस्ट डॉक्टर के मुताबिक इसमें लड़कों का लड़कियों में बदलने का औसत ज्यादा है. लड़के से लड़की बनी ट्रांसजेंडर विद्या राजपूत कहती हैं कि लड़के के रूप में जन्म लेने के बाद भी बचपन से ही मैं खुद को एक लड़की के रूप में महसूस करती थी. इसी के चलते मैने अपना जेंडर चेंज करवाया. प्रदेश में ऐसे कई लोग हैं जो जेंडर चेंज कराना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सरकारी योजना, प्रोसेस की जानकारी नहीं है, इसलिए वे नहीं करा पाते.
विद्या राजपूत का कहना है कि यहां और भी ट्रांसजेंडर क्लीनिक जैसी सुविधा होनी चाहिए, जो ऐसे लोगों की भावनाओं को समझे और उनकी मदद करे. विद्या राजपूत ने बताया की इस प्रक्रिया में 2 से 5 लाख रूपये तक का खर्च आता है.
बॉडी में होता है काफी चेंज
पॉपी देवनाथ ने बताया कि वो पहले लड़की थे, लेकिन उन्होंने अपना जेंडर चेंज करवाया और लड़के बने. पॉपी देवनाथ कहते हैं जो जेंडर चेंज करवाते हैं, उनकी पूरी बॉडी चेंज की जाती है. इसमें हार्मोन, ब्रेस्ट, कमर का शेप, चेहरे में होठ, आईब्रो, पलक, हेयरलाइन, झुर्रियां सभी चेंज होते हैं. इसके अलावा पेट और बटक को भी रिसाइज किया जाता है. जो वे चेंज करना चाहते हैं, वही चेंज किया जाता है. बहुत सारी सर्जरी करवाने के बाद मैं आज समाज में मैं अपने आप को ट्रांसमैन के रूप में प्रेजेंट करता हूं.
राजधानी रायपुर के प्लास्टिक सर्जन डॉ. सुनील कालड़ा ने बताया कि पिछले करीब 3 साल में 100 से ज्यादा लोगों ने जेंडर चेंज कराया है. इनमें से 85 फीसदी पहले लड़के थे, वहीं 15 फीसदी लड़कियां थी जिन्होंने जेंडर चेंज कर लिया है. इसके लिए चिकित्सा जांच के साथ-साथ काउंसलिंग, कानूनी प्रक्रिया जैसी लंबी औपचारिकताएं होती हैं. डॉ. सुनील कालड़ा ने बताया कि दूसरे राज्यों से भी पेशेंट आते है. जिन पेशेंट का जेंडर चेंज होता है. वह अपने तरह के ही दूसरे लोगों को इसके लिए प्रेरित करते हैं. वह सभी एक ग्रुप में एक दूसरे से परिचित रहते हैं. पूछताछ करके यहां जेंडर चेंज कराने आते हैं. उन्होंने बताया कि यहां छत्तीसगढ़ के अलावा मध्य प्रदेश, बिहार, ओडिशा और महाराष्ट्र से भी पेशेंट आए हैं.
आसान नहीं होता जेंडर चेंज
जेंडर चेंज करवाना इतना आसान नहीं होता है. पेशेंट के ऑपरेशन से पहले प्रॉपर उनकी काउंसिलिंग कराई जाती है. वो जब जेंडर चेंज के लिए पूरी तरह रेडी हो जाते हैं, तभी उनका ऑपरेशन किया जाता है. काउंसिलिंग में मनोचिकित्सक पेशेंट के हाव-भाव, उनकी मनोव्यथा और जेंडर चेंज करने के पीछे उनका कारण सब जानते हैं. आज उनहोंने जेंडर चेंज कर लिया और बाद में उन्हें इसके लिए पछतावा न हो इसके लिए ही काउंसिलिंग कराई जाती.
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FIRST PUBLISHED : June 26, 2024, 17:59 IST










