विक्रम कुमार झा/पूर्णिया : आजकल के किसान भी अब नई नई तकनीक और नई-नई विधि के साथ खेती करते हैं. जिससे कम समय और कम लागत के साथ सेहत और मुनाफा दोनों होता है. पूर्णिया जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर कसबा गांव के दनसार के किसान जितेंद्र कुमार कुशवाहा पिछले 10 वर्षों से स्ट्रॉबेरी की खेती करते हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें स्ट्रॉबेरी खेती करने का आइडिया सबसे पहले सबौर में लगे कृषि प्रदर्शनी मेले से मिला. जहां उन्होंने प्रदर्शनी में लगी स्ट्रॉबेरी को देखकर अपने खेतों में स्ट्रॉबेरी खेती करने की मन बना लिया. आज लाखों में मुनाफा कमा रहे हैं.
हरियाणा से मंगवाया था पहली बार पौधा
किसान जितेंद्र कुमार कुशवाहा ने कहा कि उन्हें नई तकनीक से नया फसल लगाने का मन था. खूब कोशिश की. लेकिन उन्हें स्ट्रॉबेरी का पौधा या बीज बिहार में नहीं मिल पाया. इसके बाद पहली बार खेती करने के लिए स्ट्रॉबेरी का पौधा हरियाणा से मंगवाया था. हालांकि किसान जितेंद्र कुमार कुशवाहा कहते हैं कि खेती में थोड़ी जानकारी नहीं रहने के कारण उन्हें नुकसान देखना पड़ा था. लेकिन अब धीरे-धीरे खेती करने से उनका अनुभव बढ़ता गया और वह अब स्ट्रॉबेरी की खेती करने में माहिर हो गए.
एक एकड़ में करते स्ट्रॉबेरी की खेती
किसान जितेंद्र कुमार कुशवाहा कहते हैं कि वह अपने 1 एकड़ खेत में स्ट्रॉबेरी की खेती करते हैं. एक एकड़ खेत में तकरीबन 5000 से अधिक पौधे लगाकर चार-पांच महीने में डेढ़ लाख से अधिक का मुनाफा कमा लेते हैं.
नेचुरल फार्मिंग से स्ट्रॉबेरी का होता उत्पादन
किसान जितेंद्र कुमार कुशवाहा ने Local 18 से बात करते हुए कहावह पूरी तरह से नेचुरल फार्मिंग से खेती करते हैं. वह खेती करने में स्ट्रॉबेरी का पौधा खुद अपने से तैयार करते हैं और अपने से तैयार किए हुए पौधों से वह स्ट्रॉबेरी की खेती करते हैं. स्ट्रॉबेरी की खेती करने में उन्हें कम लागत और कम समय के साथ ज्यादा मुनाफा मिल जाता है. हालाँकि उन्होंने कहा बाजार में बिकने वाली स्ट्रॉबेरी इससे बड़ा होता है. इसकी कीमत भी ज्यादा है, लेकिन उसका फलन 2 दिन बाद सड़ने लगता हैं. लेकिन उनके द्वारा किये गये स्ट्रॉबेरी पूरी तरह शुद्ध है. उन्होंने कहा एक पौधा 2 से 3 किलो तक फलन देता है.
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FIRST PUBLISHED : March 30, 2024, 17:00 IST










