मनप्रीत सिंह ने 15 साल तक नशे से जूझने के बाद नशा विरोधी मुहिम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
पंजाब के बरनाला जिले के धनौला निवासी मनप्रीत सिंह अब दूसरों के लिए एक प्रेरणा बन गए हैं। पंद्रह साल तक मेडिकल और स्मैक के नशे में डूबे रहने के बाद, उन्होंने पिछले दो वर्षों से नशा छोड़ दिया है और अब वह नशा विरोधी मुहिम के एक महत्वपूर्ण चेहरे के रूप में काम करेंगे।
मनप्रीत सिंह के जीवन में नशे ने तबाही मचाई थी। उन्होंने न केवल अपने परिवार के लाखों रुपये बर्बाद किए, बल्कि नशे की तलब में खुद को कई बार जख्मी भी किया। एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया, लेकिन अमृतपान (ध्यान और मानसिक शांति प्राप्त करने का तरीका) के माध्यम से उन्होंने नशे को छोड़ दिया और अपने जीवन को नया दिशा दी।
आज मनप्रीत की दिनचर्या पूरी तरह से बदल चुकी है। वह अब नियमित रूप से व्यायाम करते हैं और अपने परिवार की खेती-बाड़ी में मदद करते हैं। वह अपने व्यक्तिगत अनुभवों से लोगों को नशे से दूर रहने की सलाह देते हैं और नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
जिले के डिप्टी कमिश्नर, टी बैनिथ ने मनप्रीत से मुलाकात की और उन्हें प्रदेश सरकार की नशा विरोधी मुहिम में विशेष भूमिका देने का ऐलान किया। मनप्रीत अब स्कूलों, कॉलेजों और अन्य संस्थाओं में जाकर युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे।
डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि जो व्यक्ति खुद नशे की बुराइयों को झेल चुका है, वह दूसरों को इससे बचने के लिए सबसे बेहतर मार्गदर्शन कर सकता है। उन्होंने ऐसे अन्य लोगों से भी अपील की है जो नशा छोड़ चुके हैं, कि वे भी अपनी कहानी साझा करें और दूसरों को प्रेरित करें।
मनप्रीत का यह प्रयास उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो नशे के कारण जीवन में परेशानियों का सामना कर रहे हैं।