पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कर्नल पुष्पिंदर बाठ पर हमले में एफआईआर में देरी पर पंजाब सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कर्नल पुष्पिंदर बाठ पर हमले में एफआईआर में देरी पर पंजाब सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस के अधिकारियों द्वारा सैन्य अधिकारी कर्नल पुष्पिंदर बाठ पर कथित हमले के मामले में एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी पर पंजाब सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। जस्टिस संदीप मौदगिल ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी किया है। उन्होंने पंजाब सरकार से कई अहम सवाल पूछे हैं और विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने पूछा है कि घटना की जानकारी मिलने के बावजूद अधिकारियों ने एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की, जबकि पीड़ित कर्नल बाठ और उनके बेटे की मेडिकल रिपोर्ट पहले से उपलब्ध थी। इसके अलावा, घायल पुलिसकर्मियों की मेडिकल रिपोर्ट भी एफआईआर दर्ज करने वाले अधिकारियों को दी गई थी या नहीं, और क्या पुलिस अधिकारियों का मेडिकल अल्कोहल टेस्ट किया गया था, इसकी रिपोर्ट रिकॉर्ड में क्यों नहीं रखी गई?

कर्नल बाठ ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पंजाब पुलिस से हटकर केंद्रीय एजेंसी जैसे सीबीआई से जांच की मांग की है, उनका आरोप है कि पुलिस की जांच में देरी और निष्पक्षता की कमी है, साथ ही इसमें हितों का टकराव भी हो सकता है। कर्नल बाठ और उनके परिवार को न्याय पाने के लिए पंजाब के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और राज्यपाल तक पहुंचना पड़ा, जिसके बाद आठ दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई।

हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को दो दिन का समय दिया है, ताकि वह यह स्पष्ट करे कि क्यों सीबीआई द्वारा जांच किए जाने की याचिका को खारिज नहीं किया जाना चाहिए। इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली और सरकारी अधिकारियों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

मामले का सार: 13 मार्च की रात कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाठ और उनके बेटे पर पंजाब पुलिस के चार इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों और उनके सशस्त्र सहयोगियों ने बिना किसी उकसावे के हमला किया। हालांकि, घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, और वरिष्ठ अधिकारियों को की गई कॉल्स को नजरअंदाज कर दिया। इसके बजाय, “अज्ञात व्यक्तियों के बीच झगड़ा” की फर्जी एफआईआर किसी तीसरे व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज की गई।

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