पंजाब और हरियाणा के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसानों और मजदूरों का संघर्ष, सीएम भगवंत मान और विधायकों के घरों को घेरने का फैसला
पंजाब और हरियाणा के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसानों और मजदूरों के लंबे समय से चल रहे संघर्ष और उनके प्रदर्शनों से जुड़ी हुई है। किसान मजदूर मोर्चा (KMM) और संयुक्त किसान मोर्चा (नॉन पॉलिटिकल) ने आज सीएम भगवंत मान और अन्य कैबिनेट मिनिस्टर्स व विधायकों के घरों को घेरने का फैसला लिया है। इस आंदोलन की शुरुआत 13 महीने पहले शंभू और खनौरी बॉर्डर पर हुई थी, जब किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन करना शुरू किया था।
आंदोलन के दौरान, 19 मार्च को पंजाब पुलिस ने किसानों के नेताओं को हिरासत में लिया और शंभू तथा खनौरी बॉर्डर को खाली करवा दिया। इसके बाद दोनों बॉर्डरों पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई। इस घटना से पहले, किसान नेताओं ने 13 फरवरी 2024 को दिल्ली कूच का ऐलान किया था, जिसके लिए हरियाणा पुलिस ने शंभू और खनौरी बॉर्डर पर बैरिकेडिंग लगाकर रास्ते को बंद कर दिया था। किसान चार बार दिल्ली कूच करने की कोशिश करते रहे, लेकिन हर बार पुलिस ने उन्हें आंसू गैस के गोले से पीछे धकेल दिया।
21 फरवरी को इन टकरावों के दौरान, खनौरी बॉर्डर पर युवा किसान शुभकरण सिंह की मृत्यु हो गई, जो आंदोलन में एक दुखद घटना के रूप में दर्ज हुई। इस आंदोलन में किसान अपनी मांगों को लेकर दृढ़ थे, और उनका संघर्ष पिछले 13 महीनों से लगातार जारी था, जिसमें उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
हाल ही में, सरवण सिंह पंधेर, जो KMM के संयोजक हैं, ने इस प्रदर्शन का ऐलान किया और इसके बाद एसकेएम नॉन पॉलिटिकल के साथ एक ऑनलाइन बैठक में यह तय किया गया कि दोनों संगठन इस संघर्ष में एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे।
इस आंदोलन का उद्देश्य सरकार से उनकी मांगों को लेकर दबाव बनाना और न्याय की प्राप्ति के लिए संघर्ष करना है, और इस प्रदर्शन के जरिए वे मुख्यमंत्री और विधायकों को एक राजनीतिक संदेश देना चाहते हैं।