शिरोमणि अकाली दल को आज मिलेगा नया अध्यक्ष, सुखबीर सिंह बादल की वापसी लगभग तय

शिरोमणि अकाली दल को आज मिलेगा नया अध्यक्ष, सुखबीर सिंह बादल की वापसी लगभग तय

अकाली दल के पूर्व प्रधान सुखबीर बादल। - Dainik Bhaskar
धार्मिक संकट और सियासी चुनौतियों के बीच SAD के भविष्य की बड़ी घड़ी

अमृतसर, 12 अप्रैल – पंजाब की राजनीति में एक अहम मोड़ पर खड़ा शिरोमणि अकाली दल (SAD) आज अपना नया पार्टी अध्यक्ष चुनने जा रहा है। यह ऐलान अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर के तेजा सिंह समुद्री हॉल में चल रही डेलीगेट बैठक के दौरान किया जाएगा, जिसमें पार्टी के 567 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

सुखबीर सिंह बादल फिर से कमान संभालने को तैयार?

पार्टी सूत्रों के अनुसार, सुखबीर सिंह बादल इस पद के लिए न सिर्फ़ फेवरेट हैं बल्कि “एकमात्र उम्मीदवार” भी माने जा रहे हैं। यदि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पीछे हटने का फैसला नहीं किया, तो उनकी पार्टी प्रमुख पद पर वापसी तय मानी जा रही है।

सुखबीर बादल ने 16 नवंबर 2024 को अकाल तख्त द्वारा ‘तनखैया’ घोषित किए जाने के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद अकाल तख्त ने पार्टी के मौजूदा नेतृत्व को “अयोग्य” बताया था। हालांकि, पार्टी प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा का कहना है कि पार्टी ने धार्मिक दंड भुगत लिया है, अतः अब नेतृत्व पर कोई रोक नहीं है।

वरिष्ठ नेता बनेंगे संरक्षक

पार्टी की ओर से बलविंदर सिंह भूंदड़ को पार्टी संरक्षक (पैट्रन) बनाए जाने की संभावना है। लंबे समय से संगठन के प्रमुख चेहरों में से एक रहे भूंदड़ को सम्मानजनक भूमिका दी जाएगी। वहीं महासचिव के पद के लिए दलजीत सिंह चीमा और महेश इंदर सिंह ग्रेवाल के बीच मुकाबला होने की संभावना है।


सबसे बड़ी चुनौती: धार्मिक विवाद और संगठन में दरार

SAD इस समय कई मोर्चों पर दबाव में है।

  • धार्मिक मोर्चे पर – अकाल तख्त द्वारा नेतृत्व को अयोग्य ठहराना।

  • संगठनात्मक मोर्चे पर – पार्टी में गुटबाजी, असंतोष और घटता जनाधार।

  • राजनीतिक मोर्चे पर – 2022 के विधानसभा चुनावों में करारी हार और AAP के उभार ने SAD को कमजोर किया है।

क्या यह वापसी SAD को फिर से खड़ा कर पाएगी?

सुखबीर बादल की वापसी, यदि औपचारिक होती है, तो यह देखा जाना बाकी है कि क्या वे पार्टी की पुरानी साख को वापस ला पाएंगे या नहीं। पार्टी अब भी अकाल तख्त के आदेश की छाया में है, और कई वरिष्ठ नेता यह मानते हैं कि पार्टी को नई पीढ़ी का नेतृत्व सौंपना चाहिए।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आज का फैसला SAD के पुनर्निर्माण या और गहराते संकट – दोनों में से किसी एक राह को तय कर सकता है।
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि तेजा सिंह समुद्री हॉल से कौन निकलकर पार्टी की बागडोर संभालेगा।

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